क्या है न्यूक्लियर पावर प्लांट, आखिरी रीवा में क्यों हो रहा इसका विरोध, विधानसभा में गूजेगा मुद्दा

रीवा। जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का लगातार विरोध किया जा रहा है। पॉवर प्लांट के विरोध में ग्रामीण धरना आंदोलन कर रहे है, तो वही जल सत्याग्रह के दौरान एक महिला की मौत के बाद यह मामला प्रदेश की सियासत में गर्मा गया है। रविवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार रोझौही गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मिले। उन्होंने परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी और कहा कि रीवा में न्यूक्लियर प्लांट नहीं लगने देंगे। इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा।

क्या है न्यूक्लियर पावर प्लांट

न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्र) एक ऐसा बिजलीघर होता है जहाँ यूरेनियम जैसे रेडियोधर्मी तत्वों के परमाणु विखंडन से भारी मात्रा में ऊष्मा पैदा की जाती है। इस ऊष्मा से भाप बनाई जाती है, जो टर्बाइन को घुमाकर बिजली पैदा करती है।

रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट और विरोध

रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र के रोझौही और सरई कलां गांवों में 2×220 मेगावाट का टाटा पावर न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रस्तावित किया गया है। अक्टूबर 2026 में जब वहां भूगर्भिक और जल परीक्षण के लिए मशीनें पहुंचीं, तो स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने काम रोक दिया।

इस लिए कर रहे विरोध

ग्रामीणों को डर है कि इस प्लांट से निकलने वाले रेडिएशन से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा, कैंसर और महिलाओं में बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे उनकी खेती, पानी के स्रोतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट के लिए ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई है।

महिला की मौत से गर्माया मामला

न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना के विरोध में स्थानीय लोग तालाब के पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह कर रहे थे। इस दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई, जिसके बाद यह मामला प्रदेश में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। रीवा जिला प्रशासन का कहना है कि अभी प्रारंभिक सर्वे या मिट्टी-पानी की जांच की जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *