West Bengal Election 2026 : आज पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए भी मतदान संपन्न हो गया। इस दौरान सबसे ज्यादा नजर अगर किसी विधानसभा सीट पर सभी की है तो वो भवानीपुर सीट। क्योंकि भवानीपुर विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला हो रहा है। मतदान के दौरान टीएमसी घबराई हुई दिखाई दी, खुद ममता बनर्जी सुबह 7 बजे से ही बूथ पर उतरी हुई थी। आइए जानते हैं कि भवानीपुर विधानसभा सीट पर किसका पलड़ा भारी है?
मतदान के बीच ममता बनर्जी घबराई दिखी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में भवानीपुर सीट सबसे चर्चा का विषय बनी हुई है। यह सिर्फ चुनाव का मुकाबला नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई भी है। कोलकाता की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी। इस बार मतदान के दिन ममता बनर्जी सुबह 7 बजे ही बूथ पर पहुंच गईं।
यह पहली बार है जब वे इतने सक्रिय रूप से मतदान के दिन मैदान में नजर आईं। आमतौर पर वे अपने घर से ही निगरानी करती थीं, लेकिन इस बार उन्होंने खुद कहा कि वे मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भवानीपुर की उम्मीदवार हैं।
सुवेंदु अधिकारी दे सकते ममता बनर्जी को शिखस्त?
ममता बनर्जी में दिख रहा बदलाव ये साफ संकेत दे रहा है कि मुकाबला बहुत कड़ा है। सुवेंदु अधिकारी ने भी जोरदार चुनाव प्रचार किया है। वे लगातार सरकार पर हमला कर रहे हैं और इस सीट को भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल मानते हैं। मतदान के बीच में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी से पूछा- इधर, क्यों घूम रही हैं? कई बार सुवेंदु टीएमसी समर्थकों से भी भिड़ते नजर आएं।
भवानीपुर सीट पर किसका पलड़ा है भारी?
भवानीपुर सीट पर चुनाव का परिणाम कई वजहों पर निर्भर है, जैसे- वोटिंग प्रतिशत, शहरी मध्यम वर्ग का रुख, अल्पसंख्यक वोट बैंक और बूथ स्तर पर संगठनात्मक ताकत। यह सीट सिर्फ सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। यह सीट पूरे राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, स्थिति बहुत करीबी है। ममता बनर्जी के पक्ष में मजबूत स्थानीय पकड़, संगठनात्मक ताकत और शहरी गरीब एवं अल्पसंख्यक वोट बैंक हैं। वहीं, सुवेंदु अधिकारी के पक्ष में विपक्ष का मजबूत वोट, बदलाव की राजनीति, भाजपा का संगठन और केंद्रीय समर्थन है।
भवानीपुर का परिणाम इन चार बातों पर निर्भर करेगा
पहला- मतदान प्रतिशत
दूसरा- शहरी मध्यम वर्ग का रुख
तीसरा- अल्पसंख्यक वोट बैंक
चौथा- बूथ स्तर की पकड़
इस बार का चुनाव सामान्य नहीं बल्कि “प्रतिष्ठा बनाम चुनौती” की लड़ाई बन चुका है। ममता बनर्जी अनुभवी नेता हैं, जिनके पास प्रशासन और संगठन का अनुभव है। वहीं, सुवेंदु अधिकारी सत्ता को सीधे चुनौती दे रहे हैं। अंतिम फैसला वोटरों के हाथ में है, लेकिन यह मुकाबला बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा अध्याय बनने जा रहा है। बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई को घोषित होंगे।




