Akhilesh Yadav UP Politics : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार अब थम गया है। इस बीच ममता बनर्जी के लिए वोट मांगने की जगह अखिलेश यादव की चुप्पी ने यूपी से बंगाल तक राजनीति में हलचल मचा दी है। एक तरफ ममता दीदी के लिए तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने मैदान में उतरकर मेहनत की, वहीं दूसरी तरफ दीदी के सबसे करीबी दोस्त अखिलेश यादव सोशल मीडिया पर प्रचार करते रह गए।ल, वह बंगाल तक नहीँ गए।
आखिर क्यों जो अखिलेश यूपी में दीदी का समर्थन करते हैं, वो बंगाल की जमीन पर कदम नहीं रखे? क्या ये कोई संयोग है या फिर 2027 के यूपी विधानसभाचुनाव की कोई समझदारी वाली योजना?
सोशल मीडिया पर ‘यारी’ और मैदान में ‘दूरी’
अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा- “एक अकेली लड़ जाएगी, जीतेगी और आगे बढ़ेगी!”। उन्होंने बंगाल की पहचान और दीदी की सरकार की मजबूत बिल्डिंग का जिक्र किया, लेकिन खुद प्रचार करने नहीं पहुंचे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि क्या अखिलेश को बुलाया नहीं गया, या फिर वो खुद टोलना चाहते थे कि ममता के ‘गुंडाराज’ वाले ठप्पे से वो बच जाएं। खासकर तब, जब कांग्रेस और टीएमसी बंगाल में एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं।
दीदी के लिए राहुल गाँधी को नाराज नहीँ करना चाहते अखिलेश
यहां असली समस्या है। यूपी में कांग्रेस के साथ होने के बावजूद, राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला किया और कहा कि बंगाल में ‘गुंडाराज’ है। अब अखिलेश के सामने दुविधा थी- अगर वो दीदी के लिए वोट मांगते, तो यूपी में कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन खटाई में पड़ सकता था। इसलिए, उन्होंने ऐसा संदेश नहीं देना चाहा कि उनके और कांग्रेस के बीच कोई मतभेद हो जाए। यानी, अखिलेश ने सोशल मीडिया पर दीदी का समर्थन किया और मैदान से दूर रहकर राहुल गांधी की नाराजगी से बच गए।
कोलकाता में हुई ‘गुप्त’ मुलाकात का क्या है राज?
इसी साल जनवरी में, अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव कोलकाता गए और ममता बनर्जी से मिले। खबरें थीं कि ममता ने अखिलेश को चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था की मदद लेने का सुझाव दिया। सपा के सूत्र इसे खारिज करते हैं, लेकिन राजनीति में कुछ भी बिना वजह नहीं होता। क्या अखिलेश का बंगाल न जाना यूपी पर ध्यान देने का हिस्सा है? क्या वो अपनी छवि को किसी भी विवाद से दूर रखना चाहते हैं? खैर, बंगाल का परिणाम जो भी हो, पर अखिलेश की चुप्पी ने चर्चा जरूर तेज कर दी है।
अब सवाल है कि क्या अखिलेश यादव का बंगाल से दूरी बनाना सिर्फ संयोग है या फिर यूपी के लिए कोई बड़ी रणनीति छुपी है?




