Russia Support Iran on Homurz : दोस्त रूस के कहने पर ईरान ने अमेरिका के आगे रख दीं 3 शर्तें, क्या मानेंगे ट्रंप?

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Russia Support Iran on Homurz : ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम पर चर्चा अभी तक चल रहा है, लेकिन दोनों ओर से महज बातें ही हो रही हैं, अभी तक कोई हल नहीं निकला है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अरागची रूस पहुंच गए हैं, जिसके बाद स्थिति और भी जटिल हो गई है। दोस्त रूस के कहने पर ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए तीन शर्तें रख दी हैं और कहा है कि ये शर्तें मान ली जाएं तो ही जलमार्ग खोला जाएगा। जिसके बाद अब युद्धविराम पर संकट खड़ा हो गया है। अब सवाल है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन्हें मानेंगे या फिर युद्ध और तेज होगा?

होमुर्ज से शुरू हुई बात परमाणु कार्यकर्म पर अटकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने बताया कि वे ईरान के नए प्रस्ताव पर अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ चर्चा कर रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह टीम उनकी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल नहीं, बल्कि अलग-अलग लोग मिलकर बनी है। अभी इस पर पूरी जानकारी नहीं दी गई है। यह मामला धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, लेकिन कोई साफ फैसला नहीं हुआ है। वहीं, ईरान ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी कोई जवाब नहीं दिया है। बात होर्मुज जलडमरूमध्य की है और यह परमाणु कार्यक्रम पर अटकी हुई है।

क्या है ईरान की तीन नई शर्तें?

आईए अब जानते हैं कि आखिर ईरान ने ट्रंप के आगे कौन सी तीन शर्तें रखी हैं, जिन पर अगर ट्रंप मान जाएं तो दुनिया में शांति आ सकती है।

  1. तुरंत युद्धविराम बढ़ाना।
  2. होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना।
  3. अमेरिकी ब्लॉकड हटाना।

ईरान को मिला रूस का साथ, खुश नहीं ट्रंप

दरअसल, रूस का साथ मिलने के बाद ईरान की भाषा भी बदल गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और कहा कि पिछली वार्ताओं में कुछ प्रगति हुई थी, लेकिन अमेरिका की हाई डिमांड की वजह से समझौता नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका के रुख से खुश नहीं है। इस बीच, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी सख्त रुख दिखाया है।

होमुर्ज की जिम्मेदारी अब सेना को दी जाएगी- ईरान

ईरान की संसद की सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहीम अज़ीज़ी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की जिम्मेदारी अब सेना को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी भी सेना का नियंत्रण है और दुश्मन जहाजों के गुजरने पर रोक लगाने की तैयारी है। अज़ीज़ी ने यह भी कहा कि इस जलमार्ग से होने वाली कमाई ईरान की मुद्रा रियाल में ही ली जाएगी। गौरतलब है कि होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इस कदम का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई पर पड़ सकता है।

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