Viral Girl Case: पति को नहीं मिली अग्रिम जमानत, पॉक्सो कोर्ट ने फरार होने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई

Viral Girl Case: खरगोन के मंडलेश्वर स्थित स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने चर्चित वायरल गर्ल मामले में उसके पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने आरोपी के फरार होने, जांच में सहयोग नहीं करने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। वहीं, मामले में युवती की उम्र को लेकर कानूनी विवाद अभी भी जारी है और इसका अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।

Viral Girl Case: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में चर्चित वायरल गर्ल मामले में आरोपी पति को बड़ा झटका लगा है। मंडलेश्वर स्थित स्पेशल पॉक्सो कोर्ट (Special POCSO Court) ने उसकी अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी फिलहाल फरार है, जांच में सहयोग नहीं कर रहा और उसे राहत देने से वह सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?

विशेष न्यायाधीश रवि झारोला ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। पीड़िता के महत्वपूर्ण बयान दर्ज होना बाकी हैं और आरोपी पुलिस जांच से बचता रहा है। ऐसे में अग्रिम जमानत देना न्यायहित में उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि युवती की वास्तविक उम्र का निर्धारण ट्रायल (Trial) के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 25 मार्च को दर्ज हुई एफआईआर से जुड़ा है। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि आरोपी उनकी नाबालिग बेटी को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर केरल ले गया। वहां कुछ समय साथ रखने के बाद उसने बहला-फुसलाकर उससे विवाह कर लिया। इसी शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया।

बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्या कहा?

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई में बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि युवती अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों ने आपसी सहमति से शादी की थी। उनका कहना था कि केरल के थंपानूर थाने में युवती ने खुद को बालिग बताया था, इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उसे अग्रिम जमानत मिलनी चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने पेश किए उम्र से जुड़े दस्तावेज

विशेष लोक अभियोजक और पीड़िता की ओर से पेश वकील ने अदालत में जन्म प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज पेश किए। उनका दावा था कि विवाह के समय युवती नाबालिग थी और बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं। अभियोजन ने अदालत से जमानत याचिका खारिज करने की मांग की।

केरल हाईकोर्ट पहले दे चुका है ट्रांजिट बेल

इससे पहले 3 जून को केरल हाईकोर्ट ने आरोपी को एक महीने की ट्रांजिट बेल (Transit Bail) प्रदान की थी। कोर्ट ने उस समय उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर युवती को प्रथम दृष्टया बालिग माना था। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस ने हाईकोर्ट में दावा किया था कि प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है और वास्तविक रिकॉर्ड के अनुसार युवती नाबालिग है।

अलग-अलग दस्तावेजों से बढ़ा उम्र का विवाद

इस मामले में युवती की उम्र को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। एक ओर कुछ दस्तावेजों में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज है, जबकि मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 बताई गई है। इसी वजह से उम्र निर्धारण इस पूरे मामले का सबसे अहम कानूनी मुद्दा बना हुआ है।

ऑनर किलिंग की आशंका का भी किया था दावा

केरल हाईकोर्ट में दाखिल संयुक्त याचिका में दंपती ने दावा किया था कि अलग-अलग धर्मों से होने के कारण मध्य प्रदेश लौटने पर उन्हें ऑनर किलिंग (Honor Killing) का खतरा है। इसी आधार पर उन्होंने गिरफ्तारी से संरक्षण और ट्रांजिट बेल की मांग की थी।

फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी दोनों की मुलाकात

जानकारी के अनुसार युवती और आरोपी की मुलाकात केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और बाद में मार्च 2026 में विवाह कर लिया। इसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने विवाह पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि शादी के समय युवती नाबालिग थी और उम्र से जुड़े फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

डायरेक्टर के खिलाफ भी दर्ज है केस

इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में युवती ने फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा और तीन अन्य लोगों के खिलाफ केरल में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि नाबालिग रहने के दौरान फिल्म में काम दिलाने का झांसा देकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है।

डायरेक्टर ने आरोपों को बताया साजिश

फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें सुनियोजित साजिश बताया है। उनका कहना है कि कुछ मुद्दों पर मुखर होने के कारण उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। फिलहाल इस पूरे प्रकरण में अलग-अलग राज्यों में कानूनी कार्रवाई जारी है और कई पहलुओं की जांच अभी बाकी है।

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