Unhealthy Stomach Affects Skin : चेहरे पर बार-बार आते हैं पिंपल्स और पिगमेंटेशन, ये प्रदूषण नहीं पेट की है समस्या, जानिए सही इलाज

Unhealthy Stomach Affects Skin Health

How Gut Health Affects Skin Health : सुंदर और आकर्षक दिखने के लिए किसी भी इंसान का चेहरा उसकी पहली प्राथमिकता होता है। घरों से बाहर धूप, पॉल्यूशन के चलते त्वचा अक्सर खराब हो जाती है। खासकर महिलाओं की स्किन में मेलानिन की समस्या अधिक रहती है, जिससे चेहरे पर पिंपल्स और मेलाज्मा हो जाता है और चेहरा भद्दा दिखने लगता है। चेहरे पर निकले मुहांसों और पिगमेंटेशन के लिए इलाज के लिए कई लोग सालों तक महंगे फेसवॉश, क्रीम और स्किन ट्रीटमेंट का उपयोग करते रहते हैं, लेकिन फिर भी उनके पिंपल्स, लालिमा, खुजली या अन्य त्वचा संबंधी परेशानियां बार-बार लौट आती हैं। इसलिए इन समस्याओं का सही कारण जानकर त्वचा को बीमार बनाने से बचाना चाहिए।

त्वचा की समस्या पेट से जन्म लेती है

अक्सर लोग धूप और धूल-मिट्टी से होने वाले मुहांसे, मेलाज्मा और पिगमेंटेशन को केवल त्वचा की समस्या मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञ का कहना है कि इन समस्याओं की जड़ शरीर के अंदर, खासकर पेट और पाचन तंत्र में छिपी हो सकती है। स्किन, पाचन तंत्र, हार्मोन और इम्यून सिस्टम आपस में जुड़े होते हैं। जब इनमें से किसी एक में गड़बड़ी होती है, तो इसका असर दूसरे अंगों पर भी दिखाई देने लगता है। इस संबंध को वैज्ञानिक रूप से गट-स्किन एक्सिस कहा जाता है, जो एक जैविक प्रक्रिया है, जिसमें आंत और त्वचा के बीच निरंतर संवाद होता रहता है।

आंतों में गंदगी जमने से चेहरे पर आते हैं मुंहासे और झाइयां

त्वचा रोग विशेषज्ञ ने बताया कि त्वचा की सेहत काफी हद तक आंतों की स्थिति पर निर्भर करती है। उनका कहना है कि आंतों में मौजूद अरबों सूक्ष्मजीव शरीर में सूजन, हार्मोनल असंतुलन और त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अब डॉक्टर मुंहासे, रोजेशिया, एक्जिमा और सोरायसिस जैसी त्वचा समस्याओं में भी गट हेल्थ पर ध्यान देने लगे हैं।

क्यों होते हैं त्वचा संबंधी रोग?

यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च में भी यह पाया गया है कि आंत में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने पर त्वचा रोगों का खतरा बढ़ सकता है। मानव पाचन तंत्र में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों के समूह को गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये न केवल भोजन को पचाने में मदद करते हैं, बल्कि इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं और शरीर में संतुलन बनाए रखते हैं। जब अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं, तो गट डिस्बायोसिस की स्थिति बन सकती है। यह असंतुलन शरीर में लगातार सूजन पैदा कर सकता है, जिससे मुंहासे, एक्जिमा, रोजेशिया और सोरायसिस जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
आधुनिक जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ावा दे रही है। अधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन, तनाव, खराब नींद और अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाता है। इसका प्रभाव धीरे-धीरे त्वचा पर भी दिखाई देने लगता है।

कैसे करें त्वचा की सही देखभाल व उपचार

विशेषज्ञ का मानना है कि बेहतर त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल पर्याप्त नहीं है। फाइबर से भरपूर फल और सब्जियां, साबुत अनाज, पर्याप्त नींद, तनाव का नियंत्रण और संतुलित आहार गट हेल्थ को सुधार सकते हैं। डॉ. गजेंद्र आर के के अनुसार, दही, किमची और केफिर जैसे फर्मेंटेड फूड्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जो त्वचा को भी लाभ पहुंचाते हैं।

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