रीवा में इन दिनों व्यापारियों का आक्रोश चरम पर है। अमहिया मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रहे करीब 200 मकानों और दुकानों को हटाने के नगर निगम के फरमान ने स्थानीय व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। विरोध के सातवें दिन व्यापारियों ने अनोखा प्रदर्शन करते हुए हाथों में कटोरा लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पैदल मार्च किया और जमकर नारेबाजी की।
आंदोलनकारी व्यापारियों ने प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए। कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर व्यापारियों ने नारा दिया “दुकान दो या जहर दो”। व्यापारियों का आरोप है कि वे पिछले 60-65 वर्षों से वहां अपना व्यवसाय कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें बिना किसी ठोस व्यवस्थापन के उजाड़ा जा रहा है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ व्यापारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे शहर के विकास या सड़क चौड़ीकरण के विरोधी नहीं हैं। व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह पूर्व में फूल विक्रेताओं और सिरमौर चौराहे के व्यापारियों का व्यवस्थापन किया गया, उसी तर्ज पर उन्हें भी सुरक्षित स्थान दिया जाए।
व्यापारियों ने कहा कि 60-65 साल की उम्र में वे नया काम शुरू करने की स्थिति में नहीं हैं। अगर दुकानें गिरीं, तो उनके पास भीख मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। प्रशासन द्वारा दी जा रही चेतावनियों से व्यापारियों और रहवासियों में डर का माहौल है।
बतादें कि अमहिया मार्ग के व्यापारी पिछले एक सप्ताह से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें पुनर्वास का लिखित आश्वासन नहीं मिलता और सम्मानजनक ढंग से व्यवस्थापन नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि गरीबों की ‘आह’ बड़े-बड़े साम्राज्यों को हिला देती है, इसलिए उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर न किया जाए।
