रीवा में शिक्षा व्यवस्था की लाचारी: 110 बच्चों के लिए सिर्फ 2 कमरे, पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर मासूम

The sorry state of the education system in Rewa

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र स्थित चचाई की आदिवासी बस्ती से शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के शासकीय प्राथमिक शाला में मूलभूत सुविधाओं और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी के कारण मासूम बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। इस स्कूल में कुल 110 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन उनके बैठने के लिए स्कूल भवन में केवल दो ही कमरे उपलब्ध हैं। कक्षाओं के संचालन के लिए पर्याप्त जगह न होने के कारण शिक्षकों को मजबूरन बच्चों की पढ़ाई स्कूल परिसर में पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर करानी पड़ रही है।

कमरों के आभाव में खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने से स्कूली बच्चों को मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। खासकर बारिश और तेज धूप के दिनों में इन मासूमों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन का कहना है कि विद्यालय में नए कमरों के निर्माण और अतिरिक्त कक्षों की मांग को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन भेजे जा चुके हैं, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई सुधि नहीं ली गई।

प्रशासनिक स्तर पर कोई सुनवाई न होने से तंग आकर अब शिक्षकों ने अनोखा और मजबूरन कदम उठाया है। उन्होंने स्कूल के इस बदहाल हालात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो के जरिए शिक्षकों ने शासन और प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द अतिरिक्त कमरों का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों को इस अमानवीय स्थिति से मुक्ति मिल सके और वे सुरक्षित माहौल में अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

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