कांवड़ यात्रा। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी के साथ कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है. जिसमें लाखों शिवभक्त हरिद्वार, काशी, उज्जैन और देवघर जैसे प्रमुख तीर्थों से गंगाजल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि शुभ तिथि पर विधि-विधान से जलाभिषेक करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
समुद्र मंथन से जुड़ा है कांवड़ यात्रा
कावड़ यात्रा की शुरुआत मुख्य रूप से समुद्र मंथन की पौराणिक कथा, रावण की भक्ति, और श्रवण कुमार के सेवा भाव से जुड़ी है। सबसे प्रमुख मान्यता यह है कि भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए विष पिया था, जिसके ताप को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर गंगाजल चढ़ाया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम, श्रवण कुमार और लंकापति रावण को दुनिया का सबसे पहला कांवड़िया माना जाता है। अलग-अलग कथाओं में इनके द्वारा पहली कांवड़ लाने का जिक्र मिलता है।
ऐसे चलती है कावड़ यात्रा, कड़े है नियम
कावड़ यात्रा मुख्य रूप से हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख या सुल्तानगंज से शुरू होकर पवित्र गंगाजल उठाने के बाद शिव भक्तों के स्थानीय गाँवों, शहरों या प्रसिद्ध शिवालयों (जैसे नीलकंठ, बैद्यनाथ धाम) तक जाती है। कांवड़ यात्रा के मुख्य धार्मिक नियमों में कांवड़ को जमीन या पेड़ के नीचे न रखना, मांस-मदिरा और लहसुन-प्याज का सेवन न करना, तथा शुद्ध मन से भगवान शिव का जाप करना शामिल है। इसके अलावा यात्रा में केसरिया वस्त्र पहनना और चमड़े की चीजों का उपयोग न करना जरूरी है।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कांवड़ यात्रा के मुख्य मार्ग में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली से लेकर उत्तराखंड के हरिद्वार तक 40 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में तैनात किया गया है. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे रूट का एक हिस्सा भी 5 दिनों के लिए बंद किया गया है. इधर, गाजियाबाद में कांवड़ खंडित होने पर कांवड़ियों को परेशानी का सामना न करना पड़े. इसके लिए पुलिस के सभी 56 बूथों पर गंगाजल की व्यवस्था की है. उत्तराखंड के हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगा घाटों से गंगाजल लेकर लौटने वाले शिवभक्त पैदल, साइकिल, कार और डीजे वाली गाड़ियां लेकर निकलते हैं. मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, गाजियाबाद से लेकर दिल्ली-यूपी बॉर्डर तक जगह-जगह कांवड़ियों के लिए कैंप लगाए गए हैं।
जाने शुभ तिथिया
3 अगस्त – पहला सावन सोमवार
10 अगस्त – दूसरा सावन सोमवार और सोम प्रदोष व्रत
11 अगस्त – सावन शिवरात्रि
17 अगस्त – तीसरा सावन सोमवार और नाग पंचमी
24 अगस्त – चौथा सावन सोमवार
25 अगस्त – भौम प्रदोष व्रत
28 अगस्त – श्रावण पूर्णिमा और सावन का अंतिम दिन




