विशेष। काले-काले जामुन की इन दिनों बाजार में बहार आ गई हो, लेकिन क्या आप जानते है कि जामुन कितना फायदेमंद फल है। यह पूरी तरह से स्वदेशी फल है। शास़्त्रों में इस फल का उल्लेख है। कहा जाता है भगवान राम अपने वनवास के समय इस फल का सबसे ज्यादा उपयोग किए थें। यह फल सेहत से भरपूर होता है। जामुन खाने से सेहत को कई चमत्कारी लाभ मिलते हैं। यह फल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन शक्ति बढ़ाने, और शरीर में खून की कमी (हीमोग्लोबिन) दूर करने में बेहद फायदेमंद है। साथ ही, इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा में निखार लाते हैं और इम्युनिटी मजबूत करते हैं।
इन नामों से है पहचान
जामुन को विभिन्न घरेलू नामों से पहचान है, जैसे जामुन, राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि के नाम से जाना जाता है। प्रकृति में यह अम्लीय और कसैला होता है और स्वाद में मीठा होता है। अम्लीय प्रकृति के कारण सामान्यतः इसे नमक के साथ खाया जाता है।
ग्लूकोज-फ्रक्टोज है मौजूद
जामुन का फल 70 प्रतिशत खाने योग्य होता है। इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होते हैं। फल में खनिजों की संख्या अधिक होती है। अन्य फलों की तुलना में यह कम कैलोरी प्रदान करता है। एक मध्यम आकार का जामुन 3-4 कैलोरी देता है। इस फल के बीज में काबोहाइट्ररेट, प्रोटीन और कैल्शियम की अधिकता होती है। यह लोहा का बड़ा स्रोत है। प्रति 100 ग्राम में एक से दो मिग्रा आयरन होता है। इसमें विटामिन बी, कैरोटिन, मैग्नीशियम और फाइबर होते हैं।
करोड़ों वर्ष पुराना है यह फल
जामुन भारतीय उपमहाद्वीप का एक प्राचीन और स्वदेशी फल है, जिसका इतिहास लगभग 5 से 8 करोड़ वर्ष पुराना है। वैज्ञानिक अध्ययनों और जीवाश्मों से यह सिद्ध हुआ है कि जामुन की उत्पत्ति और विकास का मुख्य केंद्र भारत ही रहा है। प्राचीन काल में यह माना जाता था कि जामुन (सिज़ीगियम) ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया से आया है, लेकिन हालिया जीवाश्म खोजों (जैसे हिमाचल प्रदेश में मिले 2 करोड़ वर्ष पुराने अवशेष) ने साबित किया है कि यह भारत की मूल प्रजाति है।
पौराणिक महत्व
भारतीय धर्म ग्रंथों में इसे देवताओं का फल माना गया है। रामायण काल में भगवान राम द्वारा अपने वनवास के वर्षों के दौरान जामुन खाने का उल्लेख मिलता है। जामुन के वृक्ष का लंबा इतिहास होने के कारण, अक्सर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के आसपास इसके पेड़ लगाए जाते रहे हैं। प्राचीन काल में यह दक्षिण-पूर्व एशिया में फैला, इसके बाद, औपनिवेशिक काल और पुर्तगाली व्यापारियों के माध्यम से यह फल दुनिया के अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों, जैसे दक्षिण अमेरिका, कैरिबियन और फ्लोरिडा तक पहुँच गया।
स्वास्थ्य के लिये बड़ा लाभकारी है जामुन
जामुन का प्रयोग कई सारी बिमारियों के उपचार मे किया जाता है। गर्मियों के दिनों मे जामुन के सेवन करने से लू नहीं लगती है। यह कैंसर की संभावना को कम करने मे भी काफी मददगार है।
मधुमेह के उपचार में- जामुन खाने से शुगर के रोगी को फायदा होता है।यह रक्त के अंदर शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करता है। डायबिटिज के रोगी को रोजाना जामुन का सेवन करना चाहिए। रोज 100 ग्राम जामुन का सेवन करना चाहिए। जामुन की गुठली ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने मे काम आती है।
पेट की दूर होती है समस्या- पेट से जुड़ी समस्या को दूर करने के लिए जामुन फायदे मंद है। रोज सुबह खाना खाने के बाद जामुन खाने से पेट साफ होता है। पेट के अंदर ऐंठन की समस्या दूर करने के लिए जामुन की छाल का काढा बनाकर पीने से दूर हो जाती है।
एनिमिया के उपचार में-जामुन हमारे शरीर के अंदर खून की कमी को दूर करते हैं। जिस व्यक्ति के शरीर के अंदर खून की कमी हो उसे जामुन का सेवन करना चाहिए। जामुन के अंदर कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन पाये जाते हैं। जो हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाते हैं।
मसूड़ों के लिए लाभकारी-जामुन के पत्ते मसूड़ों के लिए फायदेमंद हैं। यदि मसूंडों के अंदर खून आता है तो जामून की गुंठली पीस कर नमक के साथ मसूडों पर लगाने से फायदा होता है। यदि मसूड़ों के अंदर सूजन आ रही है तो जामुन के पत्तों को उबाल कर कूल्ला करना चाहिए। यदि मुंह के अंदर दुर्गंध आ रही है तो जामुन के पत्ते चबाना चाहिए ।
यकृत (लिवर) के लिए लाभकरी-यदि लिवर के अंदर किसी प्रकार की समस्या है तो सुबह शाम जामुन का रस पीना चाहिए जिससे लिवर की समस्या ठीक हो जाएगी।
पत्थरी के उपचार में-यदि किसी व्यक्ति को पत्थरी की समस्या है तो जामुन के बीज का पाउडर दही के साथ मिलाकर रोज खाने से पत्थरी की समस्या भी दूर हो जाती है। इसी तरह जिस व्यक्ति को गठिया होता है। उसे जामुन की छाल को पीस कर जोड़ों पर लेप करने से फायदा होता है।
इन बिमारियों में भी लाभकारी
जामुन के बीजों का प्रयोग चेहरे के पिंपल्स को हटाने के लिए किया जाता है। बीजों को पीस कर दूध मिलाकर पेस्ट बनाकर सोने से पहले चेहरे पर लगाएं ऐसा कई दिनों तक करें जिससे चेहरा साफ होगा और चेहरे के दाग दब्बे दूर होंगे। आवाज को सूरीली बनाने मे भी जामुन मददगार होता है। जामुन का चूर्ण रोज चाटने से आवाज साफ और सूरीली बनती है। यदि बच्चों को दस्त की समस्या हो तो जामुन की ताजी छाल को पिस कर बकरी के दूध के साथ मिलाकर पीने से लाभ होता है। यदि बच्चे बिस्तर पर पेशाब करते हैं तो जामुन का चूर्ण खिलाने से लाभ होता है।




