एमपी में आवारा कुत्ते का कहर, मासूम समेत 7 लोगो पर किया हमला, घरों में कैद हुए लोग

श्योपुर। कुत्तों को लेकर देश की सर्वाेच्च न्यायालय लगातार आदेश जारी कर रही है, लेकिन सक्षम कार्रवाई न हो पाने से कुत्ते घूम रहे है और लोगो को अपना आहार बना रहे है। ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के श्योपुर जिला अंतर्गत ददूनी गांव से सामने आ रहा है। गांव में घूमने वाले एक कुत्ते ने मासूम बालिका समेत 7 लोगो को काट खाया है। कुत्ते के इस हमले से गांव में दहशत व्याप्त हो गई।

कुत्ते ने इन पर किया हमला

ददूनी गांव में कुत्ते ने 4 वर्षीय बालिका भक्ति जाट, 80 वर्षीय बुजुर्ग नारायण सिंह जाट, हरनाथ मेहरा, बीपी सिंह, सत्येंद्र सिंह जाट, गोलू मेहरा, दीनदयाल मेहरा सहित 7 लोगों पर हमला करके उन्हे काट खाया है। सभी को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाकर इन सभी का उपचार किया गया है।

घरों में कैद हुए बच्चे और बुजूर्ग

जो जानकारी आ रही उसके तहत घटना के बाद से ददूनी में दहशत है। स्कूल जाने वाले बच्चे घरों में बंद हैं। महिलाएं पानी भरने अकेले नहीं जा रही हैं। ग्रामीणों ने लाठी लेकर पहरा देना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत के पास कुत्ता पकड़ने के संसाधन नहीं हैं। ग्रामीणों ने हमलाबर कुत्ते को लेकर संबंधित विभाग को जानकारी दिए है, विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी और पानी की कमी से कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं।

कुत्तो को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला

आवारा कुत्तों की समस्या और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने डॉग लवर्स और एनजीओ की वे सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिनमें सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के पुराने आदेश में बदलाव करने की मांग की गई थी।

आवारा कुत्तों से जुड़े इस अहम फैसले के मुख्य बिंदु

सार्वजनिक स्थानों से हटाया जाना- स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस डिपो, एयरपोर्ट और कोर्ट परिसर जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाएगा।
दोबारा वापस नहीं छोड़ा जाएगा- इन सार्वजनिक जगहों से हटाए गए आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी (स्टरलाइजेशन) करने के बाद भी उन्हें वापस उसी इलाके में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें केवल शेल्टर होम में ही रखा जाएगा।
सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता- सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आम नागरिक और बच्चे सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित हो गए हैं, और कुत्तों द्वारा हमलों की घटनाओं (विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों पर) को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
खतरनाक कुत्तों पर नियम- जो कुत्ते स्पष्ट रूप से आक्रामक (खतरनाक) या रेबीज से पीड़ित हैं, उन्हें मानव जीवन की रक्षा के लिए पशु कल्याण नियमों के तहत मारने (इच्छामृत्यु) तक पर विचार किया जा सकता है।
एबीसी सेंटर और मेडिकल सुविधा- अदालत ने हर जिले में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर चालू करने और सभी सरकारी चिकित्सा केंद्रों पर एंटी-रेबीज वैक्सीन व इम्यूनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

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