सरला भट्ट को न्याय मिल गया?

Story Of Sarla Bhatt: 35 साल… एक इंसान की पूरी जिंदगी बदलने के लिए काफी होते हैं ये 35 साल. .. अगर किसी परिवार को अपनी बेटी के लिए न्याय का इतना लंबा इंतजार करना पड़े तो यह 35 साल सजा बन जाते हैं। ये कहानी है सरला भट्ट की…एक कश्मीरी पंडित बेटी…एक नर्स…जो लोगों की जान बचाने का काम करती थी।

साल 1990… धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर…बर्फ से ढके पहाड़… डल झील की शांत लहरें…चिनार के पेड़… और सदियों से साथ रहते आए लोग…लेकिन…1990 तक आते-आते इस स्वर्ग पर बारूद की गंध छा चुकी थी. घाटी गोलियों की आवाज़ से गूंज रही थी। आतंकवाद अपने सबसे खौफनाक दौर में पहुंच चुका था। लोग मारे जा रहे थे…धमकियां दी जा रही थीं..रात के सन्नाटे में घरों के दरवाजे डर से बंद हो जाते थे। हजारों कश्मीरी पंडितों के सामने सिर्फ दो रास्ते बचे थे…या तो सब कुछ छोड़ दो…या फिर मारे जाओ. किसी ने अपने खेत छोड़े, किसी ने दुकान, किसी ने अपना सब कुछ छोड़ दिया यहां तक कि पूर्वजों की यादें भी. एक रात में लोग शरणार्थी बन गए…अपने ही देश में…अपने ही वतन से बेघर।

लेकिन…इस दर्दनाक दौर में एक ऐसी बेटी भी थी, जिसने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि इंसानियत उसके साथ इतनी बड़ी गद्दारी करेगी। उसका नाम था…सरला भट्ट। एक साधारण कश्मीरी पंडित परिवार की बेटी। जिसके हाथ लोगों की जान बचाने के लिए बने थे। वह अस्पताल जाती थी… मरीजों की सेवा करती थी…उसे क्या पता था कि जिस घाटी में वह लोगों की जिंदगी बचा रही है…वही घाटी एक दिन उसकी जिंदगी छीन लेगी।

कौन थी सरला भट्ट

Who Was Sarla Bhatt: सरला भट्ट अनंतनाग की रहने वाली थीं। वह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में स्टाफ नर्स थीं। रोज की तरह 18 अप्रैल को सरला अपनी ड्यूटी पर जा रही थीं लेकिन इसी दौरान अस्पताल में कुछ आतंकी घुसे और सरला को अगवा कर लिया। 4 साल दिन तक सरला का कोई पता नहीं चला और इस दौरान वे आतंकी उसे शारीरिक और मानसिक रूप से टॉर्चर करते रहे, 4 दिनों तक उन्हें अलग-अलग जगहों पर ले जाकर प्रताड़ित करते रहे.

4 दिन बाद सरला का शव श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में मिला। उसका शरीर गोलियों से छलनी कर दिया गया था. खून से लथपथ सरला के शव के पास एक नोट मिला जिसमे लिखा था- ये मुखबिर है. आतंकियों ने सरला के शरीर में चाक़ू से कुरेदकर JKLF लिखा था.

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