नई दिल्ली। SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच शनिवार को चुनाव आयोग की बैठक हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में SIR से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर कई फैसले लिए गए।
आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं के नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर रह गए हैं, वे दोबारा नाम शामिल कराने के लिए दावा कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर अधिकारी उनके घर जाकर दस्तावेज भी ले सकेंगे और इन्हें वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
30 राज्यों में 13.37 करोड़ नाम कम
SIR के तीन चरणों में अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। यह SIR से पहले मौजूद कुल मतदाताओं का करीब 14.1% है। इनमें सबसे ज्यादा कमी दिल्ली में 32.8% बताई गई है। इसके बाद दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव में 29.6%, तेलंगाना में 21.7%, महाराष्ट्र में 21.1% और अंडमान-निकोबार में 20.6% की कमी दर्ज की गई।
दिल्ली और महाराष्ट्र में 30 अक्टूबर तक दावा
आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा की है। आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर उठे सवालों पर भी कहा कि SIR से जुड़े इसके प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया के अनुरूप रखा गया है।
गोवा में जिन मतदाताओं के नाम छूटे हैं, वहां बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर फॉर्म-6 लेने की प्रक्रिया करेंगे।
SIR को लेकर आयोग पर उठे सवाल
SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बाद यह बैठक अहम मानी जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई। आयोग ने बाद में कहा था कि व्यक्तिगत स्तर पर अलग-अलग राय हो सकती हैं, लेकिन आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किया है।




