Kidney Damage के संकेत देर से दिखते हैं, बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी नियम

Signs of kidney damage appear late, follow these important rules for prevention

Kidney Damage एक ऐसी दिक्कत है जो अक्सर शुरुआती लेवल में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देती है लेकिन डॉक्टर के अनुसार कई मामलों में किडनी की कार्य क्षमता काफी कम होने के बाद ही ऐसे लक्षण देखने को मिलतेहैं। हाल ही के रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर ने किडनी को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी नियमबताएं हैं। किडनी डैमेज होने के संकेत,रिस्क क्या है और बचाव के प्रभावी उपाय जानते हैं।

किडनी की बीमारी क्यों है साइलेंट प्रॉब्लम?

हमारे शरीर में विषैला पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकलने का काम किडनी करता है। डॉक्टर के अनुसार किडनी की कार्य क्षमता धीरे-धीरे कम होने पर लंबे समय तक कोई गंभीर लक्षण महसूस नहीं होने लगते हैं। इस कारण कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है जब किडनी काफी हद तक प्रभावित हो जाती है। ऑफिशियल बयान में डॉक्टर ने बताया है कि नियमित तरीके से स्वास्थ्य की जांच l इस समस्या की शुरुआती पहचान का प्रभावि तरीका हो सकता है।

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Kidney Damage के शुरुआती संकेत

हालांकि शुरुआती लेवल में लक्षण कम दिखाई देते हैं लेकिन कुछ संकेत को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। इनमें पैरों या चेहरे पर सूजन बार-बार थकान पेशाब की मात्रा में बदलाव होना रात में अधिक बार पेशाब आना और भूख कम लगा शामिल होता है। पेशाब में झाग आना या फिर लगातार हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी बताया जाताहै।

किन लोगों में Kidney Damage का खतरा होता है अधिक?

डॉक्टर के अनुसार डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों में Kidney Damage का रिस्क सबसे ज्यादा देखा जाता है। इसके अलावा मोटापा, बुरी जीवन शैली और परिवार में किडनी रोग का इतिहास आदि इसके रिस्क बढ़ा सकता है। डॉ सलाह देते हैं कि ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट करते रहना चाहिए ताकि किसी भी तरह की दिक्कत की समय से पहचान हो पाए।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं नियम

डॉक्टर की जानकारी के अनुसार किडनी की सुरक्षा के लिए ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी होता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना संतुलित आहार लेना और नियम के अनुसार शारीरिक गतिविधि करना लाभकारी होताहै।

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समय पर जांच क्यों होती है जरूरी?

किडनी रोग की पहचान केवल लक्षणों के आधार पर करना हमेशा संभव नहीं हो पाता है। इसलिए यूरिन टेस्ट और ब्लड टेस्ट की बीमारी शुरुआती अवस्था पकड़ने में मदद करतीहै।Kidney Damage के खतरे को कम करने के लिए डॉक्टर ने बताया कि समय पर जांच और सही जीवन शैली से इसको कम किया जा सकता है।

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