SCO Summit 2026: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बिश्केक में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की द्विपक्षीय बैठक, जानिए क्या रहे मुख्य मुद्दे

SCO Summit 2026

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से द्विपक्षीय वार्ता की। मध्य पूर्व में बढ़ते अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने हुई यह बैठक वैश्विक राजनीति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बिश्केक सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठक की पृष्ठभूमि

SCO सम्मेलन 2026 के दौरान हुई यह वार्ता दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ महीनों से फोन पर हो रही बातचीत के बाद पहली प्रत्यक्ष मुलाकात है। फरवरी से ही अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष तेज होने के कारण पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है।

इस स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। इस पृष्ठभूमि में, बिश्केक में हुई मोदी-पेजेशकियन बैठक में भारत की दीर्घकालिक विदेश नीति, क्षेत्रीय शांति और आर्थिक हितों पर विस्तार से चर्चा हुई।

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द्विपक्षीय वार्ता के प्रमुख बिंदु और भारत का रुख

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री यातायात से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर विचार-विमर्श किया:

  • कूटनीति और संवाद पर जोर: भारत ने अपना स्पष्ट रुख दोहराते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि कूटनीति और निरंतर संवाद (Dialogue and Diplomacy) से ही संभव है।
  • व्यापारिक विविधता और विस्तार: दोनों देशों ने भारत-ईरान व्यापारिक टोकरी (Trade Basket) को अधिक व्यापक और विविधीकृत (Diversify) करने पर सहमति व्यक्त की।
  • नेविगेशन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation): पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और आसपास के समुद्री मार्गों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • नागरिकों की सुरक्षा: वार्ता में इस बात को रेखांकित किया गया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिकों और वाणिज्यिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
  • बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: BRICS और SCO जैसे वैश्विक संगठनों में भारत और ईरान के आपसी समन्वय को और गहरा करने पर सहमति बनी।

वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज स्ट्रेट की चुनौती

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बने तनाव का सीधा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का एक प्रमुख हिस्सा कच्चे तेल का परिवहन करता है, वहां व्यवधान उत्पन्न होने से कई देशों के सामने ऊर्जा संकट की स्थिति बनी हुई है।

भारत, जो अपनी तेल आवश्यकताओं के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है, के लिए इस मार्ग का सुरक्षित रहना बेहद आवश्यक है। बैठक में भारत ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए ऊर्जा और माल की निर्बाध आपूर्ति बनी रहनी चाहिए।

कनेक्टिविटी परियोजनाएं: चाबहार और INSTC

भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंधों का एक बड़ा स्तंभ कनेक्टिविटी परियोजनाएं रही हैं। बिश्केक में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों ने चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।

चाबहार बंदरगाह न केवल भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच प्रदान करता है, बल्कि यह पाकिस्तान को दरकिनार कर एक सुरक्षित व्यापारिक मार्ग भी तैयार करता है। वर्तमान परिस्थितियों में इन व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और संचालन क्षमता बनाए रखना दोनों देशों के हित में है।

अन्य वैश्विक नेताओं के साथ पीएम मोदी की बैठकें

SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल ईरानी राष्ट्रपति से ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्राध्यक्षों से भी द्विपक्षीय वार्ता की:

  • आर्मेनिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात: पीएम मोदी ने आर्मेनियाई समकालीन निकोल पाशिनयान से रक्षा, प्रौद्योगिकी, फार्मा और शिक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
  • रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात की योजना: पीएम मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात होगी।
  • किर्गिज राष्ट्रपति से संवाद: मेजबान किर्गिज राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ भी विभिन्न क्षेत्रीय विषयों पर चर्चा का कार्यक्रम शामिल है।

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Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: बिश्केक में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: इस द्विपक्षीय बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व (West Asia) में जारी सैन्य तनाव के बीच भारत-ईरान संबंधों की समीक्षा करना, क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना, व्यापार का विस्तार करना और होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था।

Q2: अमेरिका-ईरान तनाव का भारत पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

उत्तर: इस तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता और समुद्री व्यापारिक मार्गों में बाधा उत्पन्न हो सकती है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील है।

Q3: इस बैठक में कूटनीति और शांति को लेकर भारत का क्या रुख रहा?

उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पारंपरिक रुख को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। सभी क्षेत्रीय विवादों को केवल निरंतर संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए।

Q4: क्या इस वार्ता में चाबहार पोर्ट और INSTC पर चर्चा हुई?

उत्तर: हां, भारत और ईरान के लिए चाबहार पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों ने मध्य एशिया और क्षेत्रीय व्यापारिक संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए इन परियोजनाओं पर सहयोग बनाए रखने पर चर्चा की।

Q5: SCO Summit 2026 में भारत का कुल मिलाकर क्या एजेंडा रहा?

उत्तर: SCO सम्मेलन में भारत का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद का मुकाबला, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा, बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग और सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना रहा है।

निष्कर्ष

किर्गिस्तान के बिश्केक में 26वें SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई यह वार्ता वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत की संतुलनकारी और परिपक्व कूटनीति को दर्शाती है। मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता और ऊर्जा सुरक्षा के पक्ष में मजबूती से खड़ा है। चाबहार पोर्ट जैसी रणनीतिक परियोजनाओं और बहुपक्षीय मंचों (BRICS/SCO) के माध्यम से दोनों देशों का यह संवाद न केवल द्विपक्षीय संबंधों को दिशा देगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

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