सावन माह की हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव की कृपा पाने के लिए जानें सही पूजन विधि, पौराणिक व्रत कथा और इस दिन पौधे लगाने का धार्मिक महत्व।

हरियाली अमावस्या

हिंदू धर्म में श्रावण (सावन) मास का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। सावन का पूरा महीना देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है। इस पवित्र महीने में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya) के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन स्नान, दान, ध्यान, पीपल व तुलसी की पूजा और पौधे लगाने का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि हरियाली अमावस्या के दिन विधि-विधान से पूजन करने और पौराणिक व्रत कथा सुनने से घर में सुख-समृद्धि आती है, पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

हरियाली अमावस्या का धार्मिक और पर्यावरण महत्व

सावन के महीने में चारों ओर प्रकृति में हरियाली छा जाती है, जिससे इस तिथि को ‘हरियाली अमावस्या’ का नाम दिया गया है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन केवल देवी-देवताओं की उपासना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को प्रकृति के साथ जोड़ने का एक महान संदेश भी देता है।

  • भगवान शिव और प्रकृति का संबंध: भगवान शिव प्रकृति के स्वामी माने जाते हैं। इस दिन नए पौधे लगाने से महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • पितृ दोष से मुक्ति: हरियाली अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
  • पर्यावरण संरक्षण: इस दिन पीपल, नीम, बरगद, तुलसी और आंवले जैसे पौधों का रोपण करना शास्त्रों में महादान माना गया है।

हरियाली अमावस्या पूजन विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

हरियाली अमावस्या के दिन सही विधि से पूजन करने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। पूजन के लिए नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करें:

1. स्नान और संकल्प

अमावस्या के दिन प्रातःकाल उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।

2. शिव पूजा और दीप प्रज्वलन

घर के मंदिर में दीप जलाएं और भगवान शिव तथा माता पार्वती का जलाभिषेक व बेलपत्र अर्पण करें।

3. पीपल और तुलसी पूजा

इस दिन पीपल और तुलसी के पौधे की पूजा का विशेष महत्व है। पीपल के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास माना जाता है। पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध और तिल अर्पित करें, फिर दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

4. सुहाग सामग्री का दान

सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और लंबी उम्र की कामना के लिए इस दिन हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और सुहाग का सामान अन्य महिलाओं में बांटती हैं।

5. मालपुए का भोग

हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव और पितरों को मालपुए का भोग लगाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

हरियाली अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा

हरियाली अमावस्या पर व्रत रखकर पौराणिक कथा सुनने का विशेष विधान है।

हरियाली अमावस्या

राजा की बहू और दीये की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, एक राज्य के राजा की बहू ने एक दिन घर में छुपकर मिठाई खा ली और उसका इल्जाम घर के चूहे पर लगा दिया।

चूहे ने बदला लेने की नीयत से, जब महल में मेहमान रुके हुए थे, तब बहू की साड़ी उठाकर राजा के कमरे में रख दी। सुबह साड़ी देखकर राजा ने अपनी बहू को दोषी समझा और उसे महल से बाहर निकाल दिया।

महल से बाहर निकलकर बहू रोजाना पीपल के पेड़ के नीचे जाकर शाम को दीपक जलाती, ज्वार उगाती और लोगों को गुड़धानी का प्रसाद बांटती थी।

एक रात, राजा के सैनिकों ने पीपल के पेड़ के नीचे जलते हुए दीपकों को आपस में बात करते हुए सुना। जब सैनिकों ने दीपकों से बात का कारण पूछा, तो बहू के दीपक ने पूरी सच्चाई बताई कि मिठाई बहू ने खाई थी, लेकिन साड़ी चूहे ने रखी थी और बहू पूरी तरह निर्दोष है।

सैनिकों से यह सच्चाई सुनकर राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ। उन्होंने अपनी बहू को आदरपूर्वक वापस महल बुला लिया और इसके बाद पूरा परिवार खुशी-खुशी रहने लगा।

सीख: जो व्यक्ति हरियाली अमावस्या के दिन पीपल के नीचे दीप प्रज्वलित करता है और निष्कपट भाव से दान-पुण्य करता है, उसके जीवन से झूठे आरोपों और दुखों का नाश होता है।

हरियाली अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें?

क्या करें (Do’s)क्या न करें (Don’ts)
पवित्र नदी में स्नान या गंगाजल मिलाकर स्नान करें।इस दिन घर में कलह या वाद-विवाद न करें।
कम से कम एक नया पौधा जरूर लगाएं।पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं या काटें नहीं।
पितरों के नाम से तर्पण और दान करें।सात्विक भोजन करें, मांस-मदिरा से परहेज करें।
पीपल और तुलसी की परिक्रमा करें।किसी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. हरियाली अमावस्या क्यों मनाई जाती है?

Ans: हरियाली अमावस्या सावन महीने की अमावस्या को मनाई जाती है। यह दिन प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने, भगवान शिव की पूजा करने और पितरों की शांति के लिए मनाया जाता है। इस दिन पौधे लगाने से सुख-समृद्धि आती है।

Q2. हरियाली अमावस्या पर कौन से पौधे लगाना शुभ होता है?

Ans: इस दिन पीपल, नीम, बरगद, तुलसी, आंवला, बेलपत्र और शमी का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन पौधों को लगाने से ग्रह दोष शांत होते हैं और वातावरण शुद्ध रहता है।

Q3. हरियाली अमावस्या पर सुहागिन महिलाओं को क्या करना चाहिए?

Ans: सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वे तुलसी व पीपल की पूजा करती हैं, हरी चूड़ियां, सिंदूर व बिंदी का दान करती हैं और मालपुए का भोग लगाकर कथा सुनती हैं।

Q4. क्या हरियाली अमावस्या पर पितृ तर्पण किया जा सकता है?

Ans: जी हाँ, हरियाली अमावस्या पितरों की आत्मा की शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन दान-पुण्य, पिंड दान और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Q5. हरियाली अमावस्या के दिन मालपुए का भोग क्यों लगाया जाता है?

Ans: शास्त्रों के अनुसार हरियाली अमावस्या पर मालपुआ बनाना और भगवान शिव तथा पितरों को अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। ऐसा करने से घर में खुशहाली और अन्न-धन की बरकत बनी रहती है।

Conclusion (निष्कर्ष)

हरियाली अमावस्या केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम है। सावन मास में पड़ने वाली यह अमावस्या हमें प्रकृति के करीब लाती है। इस दिन भगवान शिव की उपासना करने, पौराणिक व्रत कथा सुनने, पितरों के लिए दान-तर्पण करने और नए पौधे लगाने से जीवन में सकारात्मकता, सुख और शांति का आगमन होता है। इसलिए इस हरियाली अमावस्या पर पूजा-पाठ के साथ-साथ एक पौधा लगाकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प अवश्य लें।

अधिक जानकारी के लिए, आज ही Shabdsanchi के सोशल मीडिया पेजों को फ़ॉलो करें और अपडेटेड रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *