भारत द्वारा स्टील के आयात पर लागू कीगई Safeguard Duty का असर अब पड़ोसी देश नेपाल के स्टील उद्योग पर दिखाई देने लगा है। हाल ही के रिपोर्ट के अनुसार पिछले 11 महीना में नेपाल के आयरन और स्टील निर्यात को करीब 10.6 अरब नेपाली रुपए का नुकसान हुआ था। भारत में इस कदम का उद्देश्य घरेलू स्टील उद्योग को सस्ते आयात से बचाना है लेकिन इसका सीधा असर नेपाल के निर्यातकों परपड़ा है।

Safeguard Duty लागू होने के बाद कितना घटा है निर्यात
नेपाल के बिजनेस संगठन के अनुसार भारत को होने वाला आयरन और स्टील निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में करीब 68.7 प्रतिशत तक घट चुका है। पहले जहां नेपाल का निर्यात लगभग 15.42 अरब नेपाली रुपया था वहीं अब यह घटकर करीब 4 पॉइंट 83 अरब नेपाली रुपए रह गया है। बिजनेस के आंकड़ों से यह स्पष्ट पता चलता है कि सेफगार्ड ड्यूटी लागू होने के बाद भारतीय बाजार से नेपाली स्टील की प्रतिस्पर्धा और भी कमजोर हो गई है।
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भारत ने आखिर Safeguard Duty क्यों लगाई
भारत सरकार ने घरेलू स्टील उद्योग को सस्ते आयात से बचने के लिए कुछ स्टील के प्रोडक्ट पर 3 सालों के लिए चरणावत तरीके से सेफगार्ड ड्यूटी लागू कीहै। पहले वर्ष 12% दूसरे वर्ष 11.5% और तीसरे वर्ष लगभग 11% तक का शुल्क लगाया गयाहै। बाजार विश्लेषकों के अनुसार हाल ही के वर्षों में चीन सहित कई देशों से बढ़ते स्टील सस्ते आयात के कारण भारतीय कंपनी पर दबाव बढ़ गया था। इसी को देखते हुए सरकार के द्वारा यह कदम उठाया गया है।
अब नेपाल के उद्योग जगत की चिंता
नेपाल की स्टील उत्पादकों के अनुसार भारत उनका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है ऐसे में अतिरिक्त सुख लगने से निर्यात लागत बढ़ गई है और कई सारे ऑर्डर भी प्रभावित हुएहैं। उद्योग संगठनों के अनुसार भारत में बीस प्रमाणन से जुड़ी प्रक्रियाओं ने भी व्यापार को और भी ज्यादा कठिन बना दिया है नेपाल सरकार से भारत के साथ इस मुद्दे पर व्यापारिक बातचीत तेज करने की मांग भी की जा रही है।
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भारतीय स्टील उद्योग और निवेशकों के लिए क्या है मायने
Safeguard Duty से भारतीय स्टील कंपनियां घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है क्योंकि सस्ती आयात में कमी आने की संभावनाएं हैं। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले महीना में मांग वैश्विक स्टील की कीमतों और आयात के रुझान पर भी निर्भर करने वाला है। स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध स्टील कंपनियों के प्रदर्शन पर भी निवेशकों की अब नजर बनी रहेगी इसका ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी नीति का प्रभाव अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग देखा जा सकता है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार अगर भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक लेवल पर कोई समाधान निकलता है तो भविष्य में निर्यात स्थिति में सुधार होना संभव है फिलहाल दोनों देशों के उद्योग जगत की नजर आने वाले सरकार के फैसले और द्विपक्षीय बातचीत पर टिकी हुई है।




