Reserve Bank of India: रिजर्व बैंक यानी RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अब रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने को लेकर कुछ बातें कहीं हैं. गवर्नर ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की अत्यधिक अस्थिरता को रोकने और बाजार में व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो भी जरूरी होगा, वह कदम उठाएगा. गौरतलब है कि, RBI किसी खास विनिमय दर या स्तर को लक्ष्य नहीं बनाता, लेकिन अगर बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव या जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी दिखाई देती है, तो केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा.
डॉलर के समक्ष रुपये की गिरावट पर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में चल रहे टेंशन के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ा है. हाल ही के दिनों में रुपया मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 100 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंचने को लेकर चर्चा में रहा है. इस पर गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI के पास स्थिति संभालने के लिए पर्याप्त साधन और विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि भारत के पास लगभग 700 अरब डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व है, जो बाजार में जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त है.
क्या तनाव कम होने के बाद रुपया संभल सकता है?
गवर्नर ने बताया कि हालिया गिरावट के बाद रुपये को ओवरवैल्यूड नहीं कहा जा सकता है. उनके अनुसार, मौजूदा स्थिति में यह कहा जा सकता है कि रुपया अब Nominal और REER (Real Effective Exchange Rate) दोनों आधारों पर अंडरवैल्यूड हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद रुपया दोबारा मजबूत हो सकता है, जैसा पहले भी वैश्विक संकटों के दौरान देखा गया था.
महंगाई पर RBI का फोकस
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि RBI की प्राथमिकता अभी भी महंगाई नियंत्रण पर है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक फिलहाल “Neutral Policy Stance” पर कायम है और जरूरत पड़ने पर परिस्थितियों के अनुसार कदम उठाने की पूरी लचीलापन रखता है. उनके अनुसार, बढ़ते क्रूड ऑयल की कीमतों और ग्लोबल टेंशन के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है. हालांकि उन्होंने माना कि महंगे तेल के कारण CAD पर कुछ दबाव पड़ सकता है लेकिन सेवा क्षेत्र के मजबूत निर्यात, सोने के आयात में कमी और स्थिर रेमिटेंस फ्लो, इन दबावों को काफी हद तक संतुलित कर सकते हैं.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा FDI
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 94.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. गवर्नर ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में पूंजी निकासी और मुनाफे की वापसी में कमी आएगी. साथ ही भारत रुपये के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को बढ़ावा देने पर भी काम कर रहा है.




