राम मंदिर ट्रस्ट ने कभी कोई टैक्स चोरी नहीं की, सभी सरकारी नियमों का पालन; पूर्व महासचिव चंपत राय का दूसरा पत्र वायरल

Ram Mandir Trust Tax Dispute

अयोध्या (उत्तर प्रदेश): श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय का एक और पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय ने इस नए पत्र के माध्यम से ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन, टैक्स अनुपालन और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से सफाई दी है। चंपत राय ने स्पष्ट दावा किया है कि राम मंदिर न्यास द्वारा भारत सरकार के किसी भी टैक्स नियम का उल्लंघन या चोरी नहीं की गई है और ट्रस्ट का हर एक रुपया पारदर्शी डिजिटल बैंकिंग प्रणाली के तहत प्रबंधित किया जाता है।

मुख्य बिंदु: राम मंदिर ट्रस्ट वायरल पत्र रिपोर्ट

विवरणतथ्य व आंकड़े
संबंधित संस्थाश्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
मुख्य वक्तव्यकर्ताचंपत राय (पूर्व महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट व उपाध्यक्ष विहिप)
SIT रिपोर्ट स्थितिफाइनल रिपोर्ट शासन को सौंपी गई, चंपत राय को मिली क्लीन चिट
आगामी बोर्ड बैठक2 सितंबर (ट्रस्ट की आधिकारिक बैठक प्रस्तावित)
बैंकिंग पार्टनरस्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)
ऑडिट संस्थाएँआंतरिक एवं वैधानिक अंकेक्षण (दिल्ली स्थित सीए फर्म व वी. शंकर अय्यर)
दैनिक श्रद्धालु प्रवाहऔसतन 75,000 श्रद्धालु प्रतिदिन

SIT की फाइनल रिपोर्ट और चंपत राय को क्लीन चिट: क्या है पूरा विवाद?

राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश शासन द्वारा विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी विस्तृत जांच पूर्ण कर फाइनल रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसे आगे की आवश्यक कार्यवाही के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेज दिया गया है।

जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों में चंपत राय को पूर्ण रूप से क्लीन चिट दे दी गई है। एसआईटी की इस अंतिम रिपोर्ट में उनका नाम किसी भी अनियमितता या लापरवाही में शामिल नहीं पाया गया है। एसआईटी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद चंपत राय का यह दूसरा पत्र सामने आया है। इससे पूर्व उनका पहला पत्र 7 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक के बाद सोशल मीडिया पर सामने आया था।

“श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सरकार के किसी भी विभाग के टैक्स में एक पैसे की भी चोरी नहीं की है। न्यास से जुड़े सभी विभागों के वैधानिक कर—जैसे जीएसटी (GST), टीडीएस (TDS), रजिस्ट्री स्टाम्प ड्यूटी, लेबर सेस, पीएफ (PF) और ईएसआई (ESI)—समय पर सरकारी खाते में जमा कराए जाते हैं। ट्रस्ट का समस्त आर्थिक व्यवहार पूर्णतः पारदर्शी और कानून के दायरे में है।”

चंपत राय (पूर्व महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र)

बिना चेकबुक का बैंक खाता: 100% डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय पारदर्शिता

अपने पत्र में चंपत राय ने राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के वित्तीय संचालन का ब्योरा देते हुए बताया कि न्यास का आर्थिक ढांचा किस प्रकार शून्य-नकद (Zero-Cash) और पूर्ण-डिजिटल मॉडल पर आधारित है।

1. तीन प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाते

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य बैंक खाते देश के तीन सबसे बड़े सरकारी बैंकों में संचालित होते हैं:

2. नो-चेकबुक (No Check Book) नीति

चंपत राय का सबसे महत्वपूर्ण दावा यह है कि ट्रस्ट ने इन बैंकों से कोई चेकबुक (Check Book) जारी ही नहीं कराई है। ट्रस्ट द्वारा किए जाने वाले निर्माण कार्य, विक्रेता भुगतान, श्रम मजदूरी और प्रशासनिक खर्चों का 100% भुगतान केवल और केवल ऑनलाइन बैंकिंग (RTGS/NEFT/IMPS) के जरिए ही निष्पादित किया जाता है। नकद (Cash) के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया है ताकि किसी भी स्तर पर वित्तीय हेरफेर की गुंजाइश न रहे।

3. दो स्तरीय कड़ा ऑडिट (Two-Tier Audit System)

ट्रस्ट के खातों की प्रामाणिकता और सत्यता बनाए रखने के लिए दिल्ली की प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्मों द्वारा निरंतर जांच की जाती है:

  • आंतरिक ऑडिट (Internal Audit): दिल्ली की एक प्रमुख स्वतंत्र ऑडिट फर्म द्वारा दैनिक व मासिक आधार पर लेन-देन का आंतरिक अंकेक्षण।
  • वैधानिक अंकेक्षण (Statutory Audit): दिल्ली की प्रसिद्ध सीए फर्म वी. शंकर अय्यर एंड कंपनी द्वारा ट्रस्ट का वार्षिक वैधानिक अंकेक्षण (Statutory Audit) पूर्ण कानूनी और आयकर नियमों के तहत किया जाता है।

75 हजार श्रद्धालुओं का दैनिक प्रबंधन: बिना किसी दुर्घटना के सुगम दर्शन

वित्तीय आंकड़ों के अलावा चंपत राय ने मंदिर की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, राम मंदिर परिसर में प्रतिदिन औसतन 75,000 श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर रहे हैं। इतने बड़े जनसैलाब के बावजूद परिसर में आज तक कोई अप्रिय घटना या भगदड़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।

[ दर्शन प्रबंधन व्यवस्था ]
       │
       ├──► 8 पृथक दर्शन लेन (Cross-Movement Restricted)
       ├──► 100% निःशुल्क प्रसाद वितरण (प्रत्येक निकास मार्ग पर)
       ├──► निःशुल्क यात्री सुविधाएं (सामान घर, व्हीलचेयर, विश्राम गृह)
       └──► निःशुल्क धार्मिक अनुष्ठान व विशेष कार्यक्रम व्यवस्था

प्रशासनिक दक्षता को रेखांकित करते हुए पत्र में निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है:

  • 8 कतारबद्ध प्रवेश/निकास गलियारे (8 Lanes): श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए आठ अलग-अलग लेन बनाई गई हैं, जो बीच में एक-दूसरे को क्रॉस नहीं करतीं। इससे भीड़ का दबाव नियंत्रित रहता है।
  • निःशुल्क प्रसाद और अनुष्ठान: मंदिर के प्रत्येक निकास मार्ग पर श्रद्धालुओं को भगवान का प्रसाद पैकेट पूर्णतः निःशुल्क दिया जाता है। इसके अलावा, यदि कोई श्रद्धालु समूह मंदिर परिसर में अनुष्ठान या विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है, तो ट्रस्ट द्वारा उसके लिए भी निशुल्क व्यवस्था की जाती है।
  • पुलिस और स्थानीय प्रशासन का सहयोग: चंपत राय ने अयोध्या पुलिस और उत्तर प्रदेश शासन के कुशल सुरक्षा प्रबंधन की सराहना की है।

2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक और चंपत राय की वापसी के सियासी मायने

एसआईटी द्वारा क्लीन चिट दिए जाने और इस पत्र के वायरल होने के बाद अयोध्या और विहिप के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आगामी 2 सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक तय हुई है।

मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा बेहद गर्म है कि 2 सितंबर की बैठक में चंपत राय की पुनः ट्रस्ट में वापसी और उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का फैसला लिया जा सकता है। एसआईटी की जांच में निर्दोष साबित होने के बाद उनके समर्थकों और विहिप कैडर का मानना है कि उन पर लगे सभी झूठे आरोपों का निराकरण हो चुका है।

यह मामला केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों राम भक्तों और दानदाताओं के भरोसे से जुड़ा हुआ है। इसलिए 2 सितंबर की बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि, और निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की मौजूदगी में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

FAQ

Q1: चंपत राय के वायरल पत्र में मुख्य दावा क्या है?

Ans: चंपत राय के वायरल पत्र का मुख्य दावा यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कभी कोई टैक्स चोरी नहीं की है। ट्रस्ट जीएसटी, टीडीएस, पीएफ और ईएसआई जैसे सभी सरकारी करों का शत-प्रतिशत भुगतान करता है और सभी वित्तीय लेन-देन पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी हैं।

Q2: क्या एसआईटी ने चंपत राय को राम मंदिर मामले में क्लीन चिट दे दी है?

Ans: हां, दान चोरी और वित्तीय गबन के आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में चंपत राय का नाम शामिल नहीं है और उन्हें सभी आरोपों से पूर्णतः क्लीन चिट दे दी गई है।

Q3: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते किन बैंकों में हैं?

Ans: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आधिकारिक बैंक खाते मुख्य रूप से तीन राष्ट्रीयकृत बैंकों में संचालित होते हैं—स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)। ट्रस्ट इन खातों में बिना चेकबुक के केवल ऑनलाइन डिजिटल ट्रांसफर का उपयोग करता है।

Q4: राम मंदिर ट्रस्ट के खातों का ऑडिट कौन सी फर्म करती है?

Ans: राम मंदिर ट्रस्ट के खातों का दो स्तरीय ऑडिट किया जाता है। आंतरिक ऑडिट दिल्ली की एक स्वतंत्र सीए फर्म द्वारा किया जाता है, जबकि वैधानिक अंकेक्षण (Statutory Audit) दिल्ली की प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म ‘वी. शंकर अय्यर एंड कंपनी’ द्वारा संपन्न किया जाता है।

Q5: श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की अगली महत्वपूर्ण बैठक कब है?

Ans: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली उच्चस्तरीय बोर्ड बैठक 2 सितंबर को आयोजित होने वाली है। एसआईटी से चंपत राय को क्लीन चिट मिलने के बाद इस बैठक में उनकी ट्रस्ट में पुनः आधिकारिक वापसी और आगामी योजनाओं पर निर्णय होने की संभावना है।

निष्कर्ष: आगामी राह और प्रशासनिक दृष्टिकोण

चंपत राय के इस विस्तृत पत्र और एसआईटी की क्लीन चिट ने राम मंदिर न्यास के खिलाफ उठाए जा रहे वित्तीय सवालों पर विराम लगाने का प्रयास किया है। 100% डिजिटल बैंकिंग, बिना चेकबुक के आरटीजीएस (RTGS) भुगतान प्रणाली, और दिल्ली की प्रतिष्ठित फर्मों द्वारा ऑडिट की व्यवस्था यह दर्शाती है कि ट्रस्ट ने संस्थागत पारदर्शिता के उच्च मानकों को अपनाया है।

अब सभी निगाहें 2 सितंबर की आधिकारिक ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बोर्ड चंपत राय को पुनः महासचिव पद पर बहाल करता है या फिर प्रशासनिक व्यवस्था में नए बदलाव देखने को मिलते हैं। बहरहाल, एसआईटी रिपोर्ट और इस वायरल पत्र ने राम मंदिर के दान प्रबंधन को लेकर बनी संशय की स्थिति को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है।

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