केंद्रीय कृषि मंत्रालय मंत्री Bhagirath Chaudhari को ₹99.6 लाख सब्सिडी..

Questions raised over Union Agriculture Ministry scheme: Minister Bhagirath Chaudhari received a subsidy of ₹99.6 lakh.

Bhagirath Chaudhari: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री bhagirath chaudhri को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की एक योजना के अनुसार राजस्थान स्थित उनके खीर उत्पादन प्रोजेक्ट के लिए करीब 99.6 लाख की सब्सिडी मिलने का मामला चर्चा में देखा जा रहा है। यह सब सीधी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित हो रही योजना से मिली है जिसके बाद योजना की पारदर्शिता और हित के टकराव यानि Conflict of Interest को लेकर कई प्रकार के सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

Conflict of Interest को लेकर क्यों हुआ विवाद?

Bhagirath Chaudhari जिस कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री का पदभार संभाले हुए हैं इस मंत्रालय के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना से उन्हें अनुदान मिला है। मंत्री होने के कारण वे अनएचबी के पड़े उपाध्यक्ष भी है। हालांकि प्रोजेक्ट की अंतिम मंजूरी एक अलग प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी के द्वारा मिलती है जिसमें मंत्री प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होते हैं। यही कारण है कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया से अधिक प्रशासनिक निष्पक्षता और हित के टकराव की दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।

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NHB Scheme के नियम क्या हैं?

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की इस योजना के तहत नियंत्रित वातावरण में बागवानी के प्रोजेक्ट जैसे पॉलीहाउस या नेट हाउस के लिए योग्य किसने और बिजनेसमैन को निर्धारित सीमा तक पूंजीगत सब्सिडी दे दी जाती है। योजना के तहत योग्यता परियोजना मूल्यांकन और निरीक्षक जैसे प्रक्रिया भी निर्धारित किए गए नियम के अनुसार ही पूरे किए जाते हैं। अब तक पब्लिक नहीं रूप से उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिखा है कि मंत्री को दी गई सब्सिडी योजना नियमों के विरुद्ध स्वीकृत मिले।

इसपर विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

अगर कोई सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति इस विभाग की योजना का लाभार्थी बन जाता है तो भले ही प्रक्रिया नियमों के अनुसार हो पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास को लेकर सवाल उठता ही है। ऐसे मामलों में कई देशों में शारीरिक पदाधिकारी को स्वयं से संबंधित फैसले प्रक्रिया से अलग कर देते हैं ताकि हितों के टकराव के आशंका ही ना रहे। इस प्रकार के मामलों में स्पष्ट प्रकृति कारण और स्वतंत्र अनुमोदन प्रक्रिया पब्लिकली रूप से विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होती है।

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सरकार के लिए क्या है संकेत?

इस मामले से सरकारी योजनाओं के संचालन की पारदर्शिता और जवाबदगी को लेकर नीति निर्माता के लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न शुरू होता है। कंपनी की तरफ से अगर कोई आगे आधिकारिक स्पष्टीकरण या जाट की जानकारी पता चलती है तो उस मामले की स्थिति पता चलेगी। फिलहाल Bhagirath Chaudhari की उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे फाइनेंशियल भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं कहा जा सकता है।

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