PoK Demand to Join India : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर रावलकोट में पिछले कई दिनों से व्यापक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जो पाकिस्तान सरकार के खिलाफ हैं। इन आंदोलनों का मुख्य मकसद इलाके की स्वतंत्रता और भारत के साथ जुड़ने का संकेत देना है। स्थानीय नेताओं और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन को मजबूत किया है, जो न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर रावलकोट में पिछले 22 दिनों से लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन ईदगाह ग्राउंड में हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस इलाके को अब पाकिस्तान का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो ये लोग भारत के साथ जुड़ सकते हैं।
राजकोट में तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शन
बता दे कि प्रदर्शन की अगुवाई स्थानीय नेता कर रहे हैं, जिनमें नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सरदार अमन खान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस इलाके की ज्यादा जरूरत है, जबकि यहां के लोग पाकिस्तान की जरूरत नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लोग अपना सेना प्रमुख मानने से इनकार कर चुके हैं और किसी तानाशाह को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
भारत से मदद चाहते हैं पाकिस्तान के प्रदर्शनकारी
इसके साथ ही, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने कहा है कि वे अब पाकिस्तान के नियंत्रण को स्वीकार नहीं करते। विरोध प्रदर्शन के दौरान, कुछ लोगों ने यह भी ऐलान किया है कि अगर खाने-पीने और जरूरी चीजों पर पाबंदियां जारी रहीं, तो वे मदद के लिए भारत की ओर देख सकते हैं।
यह आंदोलन सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रह रहे समर्थकों ने भी कई देशों में पाकिस्तानी दूतावासों के बाहर प्रदर्शन किए हैं। भारत के साथ जुड़ने की यह मांग तेज हो रही है, ताकि इलाके की राजनीतिक स्थिति बदली जा सके और इस्लामाबाद पर दबाव बढ़े।




