PM Modi Gift on G7 : जी7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई खास तोहफे दिए, जिनमें भारत की अनमोल सांस्कृतिक, कृषि और हस्तशिल्प विरासत की झलक दिखाई दी। इन तोहफों में राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी अश्वगंधा, मेघालय की लकाडोंग हल्दी, जम्मू-कश्मीर का रामबन शहद, बनारसी सिल्क स्टोल, कश्मीरी सिल्क कारपेट और पारंपरिक कलाकृतियां शामिल थीं। इन उपहारों के जरिए भारत ने अपनी परंपरागत ज्ञान प्रणाली, हस्तशिल्प कला और स्थानीय उत्पादों को दुनियाभर में पहचान दिलाई।
पीएम मोदी ने दिये ये तोहफ़े
नागौरी अश्वगंधा: राजस्थान का खास तोहफा
प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के नागौर जिले में उगाई जाने वाली नागौरी अश्वगंधा भेंट की। यह औषधीय पौधा सूखी जलवायु और रेतीली मिट्टी में उगता है और इसकी उच्च गुणवत्ता वाले विथेनोलाइड तत्वों के लिए जानी जाती है। आयुर्वेद में इसे रसायन औषधि माना जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।
लकाडोंग हल्दी: मेघालय का खजाना
मेघालय के जैंतिया हिल्स क्षेत्र की लकाडोंग हल्दी का भी तोहफा दिया गया। यह हल्दी अपने अत्यधिक कर्क्यूमिन तत्व के कारण मशहूर है। इसकी लाल मिट्टी, अधिक वर्षा और पारंपरिक खेती इसे विशिष्ट बनाती है। यह हल्दी एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है।
रामबन शहद: जम्मू-कश्मीर का अनमोल उपहार
जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी का रामबन शहद भी भारत के उपहार में शामिल था। हिमालयी फूलों और जड़ी-बूटियों से तैयार यह शहद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, एंजाइम और पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। यह स्थानीय मधुमक्खी पालकों की पारंपरिक जीविका का प्रतीक भी है।
बनारसी सिल्क स्टोल: भारतीय परंपरा का प्रतीक
वाराणसी का बनारसी सिल्क स्टोल, महीन रेशम और जरी के जटिल काम से बना, भारतीय वस्त्र परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। यह स्टोल प्राकृतिक डिजाइनों और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे GI टैग प्राप्त है, जो इसकी विशिष्टता को दर्शाता है।
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को मिले तोहफे
प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को थेवा मोटिफ कफलिंक भेंट किया, जो राजस्थान के प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध कला है। इसमें सोने की नक्काशी और रंगीन कांच का काम होता है। साथ ही, राष्ट्रपति को हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर भी दिए गए, जो महाराष्ट्र की हिमरू बुनाई कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इसके अलावा, डोकरा एंटीलोप सेट भी भेंट किया गया, जो छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगरों की कला का प्रतीक है। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को कश्मीरी सिल्क कारपेट भी उपहार में दिया गया, जो प्राकृतिक रेशम से बुना हुआ है।
भारत ने फ्रांस को दिया उपहार
फ्रांस की प्रथम महिला को पोचमपल्ली सिल्क स्टोल भेंट किया गया, जो तेलंगाना की इकत बुनाई तकनीक से बना है। राष्ट्रपति मैक्रों को महाभारत पर आधारित कलमकारी पेंटिंग दी गई, जिसमें महाभारत के प्रसंगों को पारंपरिक शैली में दर्शाया गया है। इन उपहारों का मकसद भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को दुनिया तक पहुंचाना था।
भारत की सॉफ्ट पावर का संदेश
इन उपहारों के जरिए भारत ने अपनी सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प कौशल और ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश दुनिया तक पहुंचाया। यह केवल स्मृति चिन्ह नहीं थे, बल्कि भारत की समृद्ध विरासत और आत्मनिर्भरता का भी प्रदर्शन थे।



