बॉलीवुड फिल्म 3 Idiots में ‘चतुर रामलिंगम’ यानी ‘साइलेंसर’ का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्य ने एक वीडियो शेयर कर लोगों से सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि समाज के लिए इतना काम करने वाला इंसान इस तरह अपनी जान जोखिम में डाले।
वीडियो में ओमी ने पहले फिल्म के मशहूर किरदार ‘फुंसुक वांगड़ू’ का जिक्र करते हुए कहा, “मैं नहीं चाहता कि फुंसुक वांगड़ू मर जाए।” इसके बाद उन्होंने खुद को 3 Idiots का ‘चतुर’ बताते हुए कहा कि वह एक जरूरी संदेश देना चाहते हैं।
ओमी ने बताया कि फिल्म में आमिर खान का ‘फुंसुक वांगड़ू’ वाला किरदार असल जिंदगी के इंजीनियर, शिक्षक और इनोवेटर सोनम वांगचुक से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि उनकी सोनम से मुलाकात हो चुकी है और वह बेहद सादगी से रहने वाले और समाज के लिए काम करने वाले इंसान हैं।
उन्होंने लोगों का ध्यान सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल की ओर दिलाते हुए कहा कि वह कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर हैं। ओमी के मुताबिक, लंबे समय से खाना न खाने की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई है और उनका ब्लड शुगर लेवल भी काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
ओमी वैद्य ने बताया कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, लद्दाख के लोगों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर किसी की सोच अलग हो सकती है, लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति को मुश्किल में नहीं छोड़ना चाहिए जिसने हमेशा समाज के लिए काम किया हो।
वीडियो के आखिर में ओमी ने लोगों से अपील की कि अगर वे सोनम वांगचुक की मांगों से सहमत हैं तो सोशल मीडिया पर उनकी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। उनके पोस्ट शेयर करें, ट्वीट रीट्वीट करें और जनप्रतिनिधियों व सरकारी अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाएं ताकि इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ सके।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि हम अक्सर अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि आसपास हो रही जरूरी बातों पर ध्यान नहीं दे पाते। इसलिए थोड़ा वक्त निकालकर इस मुद्दे को समझें और अगर सही लगे तो अपनी आवाज जरूर उठाएं।
बता दें कि सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े संवैधानिक और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देना, स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाना शामिल है। इन मांगों को लेकर वह कई बार पदयात्रा और अनशन कर चुके हैं। इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी होती रही है। सरकार का कहना है कि वह लद्दाख के विकास और वहां के लोगों के हित में लगातार काम कर रही है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।




