भोपाल। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी NFHS-6 की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश में बाल विवाह को लेकर अलग-अलग जिलों की तस्वीर सामने आई है। जहां भोपाल में 18 साल से कम उम्र में विवाह का आंकड़ा बढ़ने की बात सामने आई है, वहीं इंदौर में इसमें बड़ी कमी दर्ज की गई है।
NFHS-6 का सर्वे 2023-24 में हुआ था। इसकी रिपोर्ट में देश और राज्यों के साथ जिलों से जुड़े स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के कई आंकड़े जारी किए गए हैं।
भोपाल में बाल विवाह का आंकड़ा बढ़ा
भोपाल में NFHS-5 के दौरान 18 साल से पहले विवाह करने वाली 20-24 साल की महिलाओं का आंकड़ा 11.3% बताया गया था। आपके उपलब्ध जिला आंकड़ों के मुताबिक NFHS-6 में यह बढ़कर 12.3% हो गया है।
यानी भोपाल में करीब 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सर्वे के दौरान ऐसी महिलाओं से भी जानकारी ली गई, जिनका विवाह 18 साल की उम्र से पहले हो चुका था।
हालांकि, इस जिला आंकड़े को प्रकाशित करने से पहले NFHS-6 की संबंधित भोपाल जिला फैक्टशीट से एक बार मिलान करना जरूरी है।
इंदौर में बाल विवाह के मामलों में राहत
इंदौर की तस्वीर भोपाल से अलग है। यहां 18 साल से पहले विवाह करने वाली 20-24 साल की महिलाओं का आंकड़ा NFHS-5 में 21.7% था।
उपलब्ध NFHS-6 जिला आंकड़ों के मुताबिक यह घटकर 10.6% रह गया है। यानी इंदौर में करीब 11 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज हुई है।
यह बदलाव बाल विवाह की रोकथाम के लिहाज से राहत देने वाला माना जा सकता है। हालांकि, सिर्फ सर्वे के आंकड़ों के आधार पर कमी के कारणों को तय नहीं किया जा सकता।
ग्वालियर की तस्वीर चिंता बढ़ाती है
ग्वालियर में कम उम्र में विवाह और कम उम्र में मातृत्व को लेकर भी चिंता सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जनवरी 2025 तक करीब 300 गांवों में 354 ऐसी लड़कियों की पहचान की गई थी, जो नाबालिग उम्र में मां बन चुकी थीं।
यह आंकड़ा स्थानीय स्तर पर बाल विवाह और किशोरियों के स्वास्थ्य की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस 354 के आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए नहीं मिल सकी है।
अस्पताल पहुंचीं नाबालिग माताएं, कार्रवाई पर सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, इन लड़कियों में से कई प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंचीं। आरोप है कि इलाज के बाद बाल विवाह या नाबालिग मातृत्व के मामलों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।
अगर नाबालिग लड़की गर्भवती होकर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचती है, तो ऐसे मामलों में बाल संरक्षण और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए सामने आए मामलों की जांच और उनकी रिपोर्टिंग जरूरी है।
MP में कुल तस्वीर क्या कहती है?
NFHS-6 के मध्य प्रदेश राज्य फैक्टशीट के मुताबिक, 20-24 वर्ष की महिलाओं में 18 साल से पहले विवाह का आंकड़ा 20.1% है। NFHS-5 में यह 23.3% था। यानी राज्य स्तर पर इसमें कमी दर्ज हुई है।
इसलिए मध्य प्रदेश के लिए यह कहना सही नहीं होगा कि NFHS-6 में पूरे राज्य में बाल विवाह बढ़ गया है। जिला स्तर पर तस्वीर अलग-अलग हो सकती है। भोपाल और इंदौर के उपलब्ध आंकड़े इसी अंतर को दिखाते हैं।
बाल विवाह रोकना अब भी बड़ी चुनौती
18 साल से कम उम्र में लड़कियों का विवाह उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर असर डाल सकता है। NFHS जैसे सर्वे इन आंकड़ों के जरिए यह समझने में मदद करते हैं कि किन क्षेत्रों में स्थिति सुधरी है और कहां अभी ज्यादा काम की जरूरत है।
मध्य प्रदेश में जिला स्तर पर सामने आ रहे आंकड़ों को देखते हुए प्रशासन के लिए बाल विवाह प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करना और वहां जागरूकता, शिक्षा तथा निगरानी व्यवस्था मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।




