मध्य प्रदेश में मूंग खरीद घोटाला: फसल उगाई नहीं, फिर भी सरकार ने खरीदी मूंग

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भोपाल। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से मूंग खरीदी को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। कई किसानों को पता चला कि सरकार ने उनके नाम से मूंग खरीदी है। हैरानी की बात यह है कि इन किसानों ने न तो मूंग की फसल उगाई थी, न मूंग बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था और न ही वे खरीद केंद्र पर गए थे।

जांच में सामने आया कि किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी तरीके से मूंग खरीदी का पूरा खेल रचा गया। जब किसानों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी कि उनके रिकॉर्ड का इस्तेमाल सरकारी खरीदी के लिए किया जा रहा है।

कंप्यूटर ऑपरेटरों पर FIR, ऐसे सामने आया मामला

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल सहकारी समितियों के खरीद केंद्रों पर टर्मिनल चलाने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के जरिए किया गया। मामले में तीन कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

जांच के मुताबिक आरोपियों ने ऐसे किसानों की पहचान की, जिन्होंने मूंग की फसल नहीं उगाई थी। इसके बाद उनकी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्रेशन कराया गया। आरोप है कि बाजार से कम कीमत पर मूंग खरीदकर उसे सरकार को MSP पर अधिक कीमत में बेचा गया।

जिन किसानों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया, उन्होंने कभी मूंग बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था।

तीन सहकारी समितियों से जुड़ा है मामला

जांचकर्ताओं के मुताबिक यह मामला रायसेन जिले की बाड़ी तहसील की तीन सहकारी समितियों से जुड़ा है। आरोप है कि दो खरीदी सीजन के दौरान इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।

जांच में जमीन के रिकॉर्ड, किसानों के बयान और सहकारिता विभाग की दो आंतरिक जांचों को आधार बनाया गया है। इसी आधार पर मामले को फर्जी मूंग खरीदी से जोड़कर देखा जा रहा है। मामले में आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

जांच के मुताबिक इस कथित फर्जीवाड़े से आरोपियों ने अब तक करीब 13.3 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मध्य प्रदेश के किसान मूंग खरीदी और MSP को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

कैसे रचा गया पूरा खेल?

जांच में पता चला कि सहकारी समितियों के कंप्यूटर ऑपरेटरों के पास किसानों की जमीन और खरीदी से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंच होती है। इसमें ऐसे किसान भी शामिल थे, जिन्होंने मूंग बेचने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था।

आरोप है कि इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर ऐसे किसानों की पहचान की गई और उनके नाम या जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए। इसके बाद आरोपियों या उनके करीबियों ने बाजार से कम कीमत पर मूंग खरीदी और उसे सरकारी खरीदी केंद्रों पर MSP पर बेच दिया।

जांच के अनुसार, बाजार से मूंग खरीदने और सरकार को अधिक कीमत पर बेचने के बीच का अंतर ही आरोपियों का मुनाफा था।

किसानों को नहीं थी सरकारी खरीदी की जानकारी

मामला तब सामने आया जब कुछ किसानों को पता चला कि उनके नाम और जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में मूंग की खरीदी दिखाई गई है, जबकि उन्होंने मूंग की खेती ही नहीं की थी।

इसके बाद किसानों ने मामले की शिकायत की। जांच टीम ने जब किसानों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उन्हें न तो मूंग बेचने की जानकारी थी और न ही उनके नाम पर हुई बिक्री से पैसे मिलने की कोई सूचना थी।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस फर्जी खरीदी में कितने किसानों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया और इसके पीछे कितने लोग शामिल हैं।

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