MP Handpump Installation Rules: मध्यप्रदेश में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने के लिए हैंडपंप और नलकूप खनन संबंधी नई SOP लागू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब हैंडपंप या नलकूप स्थापना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद जियो-हाइड्रोलॉजिकल सर्वे, तकनीकी परीक्षण और पानी की गुणवत्ता जांच की जाएगी। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही संबंधित कार्य को मंजूरी दी जाएगी, जिससे जरूरतमंद क्षेत्रों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
MP Handpump Installation Rules: मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE Department) ने हैंडपंप और नलकूप खनन को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी गांव में हैंडपंप स्थापित करने से पहले तय प्रक्रिया, तकनीकी जांच और जल गुणवत्ता परीक्षण से गुजरना अनिवार्य होगा। विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद ग्रामीण क्षेत्रों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
आवेदन के लिए अपनानी होगी निर्धारित प्रक्रिया
नई SOP के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में नए हैंडपंप या नलकूप की मांग होने पर ग्राम पंचायत, स्थानीय जनप्रतिनिधि अथवा ग्रामीण नागरिक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन मिलने के बाद संबंधित उपयंत्री (Sub Engineer) स्थल का निरीक्षण करेगा और आवश्यकता का आकलन करने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जियो-हाइड्रोलॉजिकल सर्वे रहेगा अनिवार्य
नई व्यवस्था में (Geo-Hydrological Survey) को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। किसी भी हैंडपंप या नलकूप को मंजूरी देने से पहले कम से कम तीन संभावित स्थानों का सर्वे किया जाएगा। इस दौरान भूजल की उपलब्धता, जलस्तर और तकनीकी व्यवहार्यता का परीक्षण किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सबसे उपयुक्त स्थान का चयन होगा।
नल-जल योजना को दी जाएगी प्राथमिकता
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जहां (Tap Water Scheme) या नल-जल योजना के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराना संभव होगा, वहां हैंडपंप लगाने के बजाय उसी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि पाइप आधारित जल आपूर्ति प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अधिक टिकाऊ और दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकती है।
GHAN Portal से होगी निगरानी
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विभाग ने ग्रामीण हैंडपंप निगरानी पोर्टल (GHAN Portal) को पूरी प्रक्रिया से जोड़ा है। इस पोर्टल पर हैंडपंपों की लोकेशन, संचालन स्थिति और अन्य जरूरी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इससे विभागीय निगरानी मजबूत होगी और आम लोगों को भी आवश्यक जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
Water Quality Test के बाद ही शुरू होगा हैंडपंप
नई SOP के तहत केवल बोरवेल या नलकूप खोद लेना पर्याप्त नहीं होगा। खनन कार्य पूरा होने के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच (Water Quality Test) अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। भारतीय मानक ब्यूरो के (BIS-10500 Standards) के अनुरूप पानी पाए जाने पर ही हैंडपंप को चालू करने की अनुमति दी जाएगी।
सूखे बोरवेल को खुला छोड़ना होगा प्रतिबंधित
सुरक्षा के मद्देनजर विभाग ने असफल या सूखे बोरवेल (Dry Borewell) को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। यदि किसी स्थान पर बोरवेल में पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, तो उसे खुला नहीं छोड़ा जा सकेगा। ऐसे बोरवेल को तत्काल सुरक्षित तरीके से बंद और सील करना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके।
चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी प्रक्रिया
नई SOP में आवेदन, निरीक्षण, सर्वे, तकनीकी स्वीकृति, जल गुणवत्ता परीक्षण और स्थापना तक की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध (Step-by-Step Process) तरीके से निर्धारित किया गया है। इससे अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा और पात्र ग्रामीण क्षेत्रों को समय पर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों के अनुसार पीएचई विभाग की यह नई SOP ग्रामीण पेयजल प्रबंधन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। (Digital Monitoring), (Water Quality Management) और (Scientific Survey) जैसे प्रावधानों के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।




