MP: गृहग्राम और ससुराल में नहीं रहेंगे पंचायत सचिव, रिश्तेदार सरपंच बने तो स्थानांतरण अनिवार्य

MP Panchayat Secretaries Transfer Policy: नई गाइडलाइंस के अनुसार पंचायत सचिवों का स्थानांतरण कुछ खास मामलों में अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें यदि सचिव का कोई निकट रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाता है, सचिव अपने पैतृक गांव या ससुराल वाली पंचायत में पदस्थ है, भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतें दर्ज हैं तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो या लोकायुक्त (Lokayukt) और ईओडब्ल्यू (EOW) जैसी जांच एजेंसियों के मामले चल रहे हों, तो ऐसे सभी मामलों में सचिव का तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

MP Panchayat Secretaries Transfer Policy: तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (Panchayat and Rural Development Department) ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई सख्त गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। नई नीति के अनुसार अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृह ग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा।

रिश्तेदार सरपंच-उपसरपंच बने तो अनिवार्य तबादला

नई गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि यदि किसी पंचायत सचिव का रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाता है तो उस सचिव का तुरंत स्थानांतरण किया जाएगा। विभाग ने यह व्यवस्था भ्रष्टाचार और मिलीभगत को रोकने के लिए की है।

15 जून तक पूरे होंगे जिले के अंदर तबादले

9 जून को जारी आदेश के मुताबिक जिले के भीतर पंचायत सचिवों के तबादले 15 जून तक पूरे कर लिए जाएंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे। प्रदेश में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं।

10 साल से ज्यादा पदस्थ सचिवों को प्राथमिकता

विभागीय निर्देशों के अनुसार एक ही पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत सचिवों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा। यदि ऐसी अधिक संख्या में सचिव हों तो सबसे पुराने वाले का पहले तबादला होगा।

कब होगा अनिवार्य स्थानांतरण?

नई गाइडलाइंस में कुछ मामलों में पंचायत सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य कर दिया गया है, जिनमें सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुना जाना, सचिव का पैतृक गांव या ससुराल की पंचायत में पदस्थ होना, भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतें तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई या लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू (Lokayukt, EOW) जैसी जांच एजेंसियों के मामले शामिल हैं।

अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक

अंतरजिला स्थानांतरण (Inter-District Transfer) केवल स्वैच्छिक आधार पर ही स्वीकार किए जाएंगे। महिला सचिवों (Married, Widow & Divorced) को विशेष छूट दी गई है। वे पति, ससुराल या माता-पिता वाले जिले में आवेदन कर सकेंगी। अनुकंपा नियुक्ति वाले सचिव भी अपने मूल जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकते हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने यह नई पॉलिसी इसलिए बनाई है क्योंकि 1994-96 के दौरान हुई पंचायत सचिवों की नियुक्तियों में अधिकांश मामलों में रिश्तेदारों को ही जगह मिली थी, जिससे कई जगहों पर सरपंच और सचिव के बीच मिलीभगत के मामले सामने आए थे।

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