रीवा। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आज रीवा के श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के तत्वावधान में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने उपस्थित डॉक्टरों, नर्सों और चिकित्सीय स्टाफ को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने पर जोर दिया। डिप्टी सीएम ने चिकित्सा जगत से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए पूरी संवेदनशीलता और समर्पण भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर हुई 135, जमीनी अमले की मेहनत रंग लाई
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रदेश के स्वास्थ्य सूचकांकों में हुए सुधार की सराहना की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों और जमीनी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य अमले की दिन-रात की मेहनत का ही परिणाम है कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर अब 135 पर आ गई है। उन्होंने कहा कि यदि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का समय पर स्वास्थ्य परीक्षण और उचित देखभाल सुनिश्चित की जाए, तो इस आंकड़े में और भी क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है।
एनीमिया मुक्त भारत अभियान में मध्य प्रदेश देश में अव्वल
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश की एक और बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए डिप्टी सीएम ने बताया कि ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के तहत महिलाओं और किशोरियों में खून की जांच कर एनीमिया के स्तर का पता लगाने के मामले में मध्य प्रदेश पूरे भारत में नंबर एक स्थान पर आया है। सरकार का यह प्रयास रंग ला रहा है और देश स्तर पर एमपी की इस रणनीति को सराहा जा रहा है।
सही समय पर हीमोग्लोबिन की जांच से मजबूत होगी देश की आधी आबादी
राजेंद्र शुक्ल ने स्वास्थ्य रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य किशोरियों को सही समय पर हीमोग्लोबिन के स्तर के बारे में जागरूक करना है, ताकि वे एनीमिया (खून की कमी) का शिकार न होने पाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसी किशोरी या महिला को उपचार की आवश्यकता है, तो समय पर इलाज शुरू किया जा सके ताकि देश की आधी आबादी शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहे, क्योंकि एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का स्वस्थ होना सबसे पहली शर्त है।




