MP: मध्य प्रदेश में सिंचाई का बड़ा विस्तार, 14 जिलों की परियोजनाएं तैयार, 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि होगी सिंचित

Ken Mandakini Link Project: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि अगले छह माह के भीतर 14 जिलों की पूर्ण हो चुकी सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। इन परियोजनाओं के शुरू होने से करीब 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी। वहीं स्लीमनाबाद टनल (Sleemanabad Tunnel) और बरगी व्यपवर्तन परियोजना (Bargi Diversion Project) के पूरा होने से भी प्रदेश के लाखों हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

Ken Mandakini Link Project: मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का दायरा तेजी से बढ़ाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश के 14 जिलों की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। अगले छह माह के भीतर इन परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जिससे करीब 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि सिंचाई के दायरे में आ जाएगी।

14 जिलों की परियोजनाएं उद्घाटन के लिए तैयार

मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को परियोजनाओं के लोकार्पण की तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए। जिन जिलों की सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उनमें बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला सहित 14 जिले शामिल हैं। इन परियोजनाओं के शुरू होने से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

केंद्र को भेजा गया केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने बताया कि केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना (Ken-Mandakini Link Project) का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। इस परियोजना के पूरा होने पर लगभग 93,310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, साथ ही 15.8 मेगावाट बिजली उत्पादन भी संभव होगा। परियोजना के तहत करीब 20 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण भी किया जाएगा।

बुंदेलखंड के 10 जिलों को मिलेगा बड़ा लाभ

केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के 10 जिलों में लगभग 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई क्षमता विकसित होगी। इसके अलावा करीब 130 मेगावाट बिजली उत्पादन का भी लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन के तहत 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान किया जा चुका है।

पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से भी बढ़ेगी सिंचाई

संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के जरिए प्रदेश के 13 जिलों में लगभग 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्यीय परियोजना के अंतर्गत चकरपुर और मड़िया बांध का निर्माण पूरा हो चुका है। वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त कारम बांध का पुनर्निर्माण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियां भी तेज

सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का लगभग 82 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वहीं कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना 66 प्रतिशत तक पूरी हो गई है। इसके अलावा शिप्रा नदी के किनारे 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिसमें करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

जल्द होगा स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नर्मदा और सोन नदी को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल (Sleemanabad Tunnel) के उद्घाटन की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत बनी यह ट्रांस-वैली नहर प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक क्षमता वाली नहर होगी।

इस परियोजना के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के करीब 1,500 गांवों की लगभग ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। करीब डेढ़ दशक से निर्माणाधीन यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

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