MP Reservation in Promotion: हाई कोर्ट जबलपुर में पदोन्नति नियमों (Promotion Rules) को लेकर सुनवाई पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। लेकिन निर्णय जारी होने से पहले ही मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हो गई। अब जज बदलने के कारण इस मामले में नई बेंच (New Bench) के सामने दोबारा सुनवाई होगी। लंबे समय से प्रमोशन (Promotion) नहीं होने का असर नई सरकारी भर्तियों (Government Recruitment) पर भी पड़ रहा है, क्योंकि पद खाली नहीं होने से नियुक्तियां अटक रही हैं। इससे राज्य सरकार के 2028 तक 2.5 लाख पदों पर भर्ती के लक्ष्य (Recruitment Target) पर भी असर पड़ सकता है।
MP Reservation in Promotion: मध्यप्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया (Promotion Process) वर्ष 2016 से लगातार रुकी हुई है। सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए नए नियम (New Rules) बनाए, लेकिन इन नियमों को लेकर मामला फिर हाई कोर्ट में पहुंच गया।
जबलपुर हाई कोर्ट (Jabalpur High Court) में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। उम्मीद थी कि जल्द ही निर्णय आ जाएगा, लेकिन इससे पहले ही सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नियुक्ति हो गई। अब मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच (New Bench) का गठन होगा, जिसके बाद प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी।
नई बेंच बनने से बढ़ सकता है इंतजार
मुख्य न्यायाधीश के स्थानांतरण के बाद अब इस मामले को नई पीठ के सामने रखा जाएगा। नई बेंच को पूरे मामले की जानकारी और पहले हुई सुनवाई के रिकॉर्ड देखने होंगे। इसके बाद ही आगे की सुनवाई शुरू होगी। इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है, जिसका सीधा असर सरकारी भर्तियों (Government Recruitment) पर भी पड़ने की संभावना है। दरअसल, जब तक पुराने कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं मिलेगी, तब तक कई पद खाली नहीं होंगे और नई नियुक्तियों (New Appointments) के लिए जगह सीमित रहेगी।
सामान्य वर्ग की आपत्ति से शुरू हुआ विवाद
सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए फैसले (Reserved Judgment) को 90 दिनों से अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। इसी वजह से सरकार और कर्मचारियों को उम्मीद थी कि जून के शुरुआती दिनों में फैसला आ सकता है। लेकिन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद मामला फिर अटक गया।
मई 2016 से बंद है पदोन्नति का रास्ता
मध्यप्रदेश में पदोन्नतियां मई 2016 से बंद हैं। उस समय हाई कोर्ट ने पदोन्नति नियम 2002 (Promotion Rules 2002) को रद्द कर दिया था। इसके बाद से विभागों में पदोन्नति की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई। सरकार ने प्रशासनिक कामकाज जारी रखने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च पद का प्रभार (Additional Charge) दिया, लेकिन इससे उन्हें पदोन्नति से मिलने वाला आर्थिक लाभ (Financial Benefits) नहीं मिल पाया।
भर्ती योजनाओं पर भी पड़ सकता है असर
राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक करीब ढाई लाख पदों पर भर्ती (Recruitment Target) का लक्ष्य तय किया है। इनमें से 78 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं, 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) से जुड़े मामले के कारण 13 प्रतिशत पद अभी रुके हुए हैं। इसके चलते लगभग 13 से 14 हजार नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं।फिलहाल भर्ती प्रक्रिया उन्हीं पदों के लिए आगे बढ़ रही है, जो नए सिरे से बनाए गए हैं। इनमें स्वास्थ्य विभाग (Health Department) और ऊर्जा विभाग (Energy Department) के पदों की संख्या अधिक है।




