मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election 2026) में कांग्रेस (Congress) उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) को बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने उनके नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है।
मीनाक्षी नटराजन ने अदालत में दावा किया था कि निर्वाचन आयोग (Election Commission) और रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) ने मनमाने तरीके से उनका नामांकन निरस्त किया है। उन्होंने कोर्ट से राज्यसभा चुनाव लड़ने की अनुमति देने की मांग की थी।
सुनवाई में सिंघवी ने रखी दलील
सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील (Abhishek Manu Singhvi) अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन को चुनावी प्रक्रिया से शुरुआती चरण में ही बाहर कर दिया गया।
उन्होंने कोर्ट से कहा,
“उन्हें चुनाव लड़ने दिया जाए। यदि उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिलते हैं तो वे हार जाएंगी, लेकिन लोकतंत्र (Democracy) में फैसला मतदाताओं को करना चाहिए।”
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट (Third Rajya Sabha Seat) के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के पास उन्हें जिताने के लिए पर्याप्त विधायकों (MLAs) का समर्थन भी माना जा रहा था।
लेकिन 9 जून को उनके नामांकन पत्र की जांच के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने खिलाफ लंबित एक मामले की जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी। इस आपत्ति को सही मानते हुए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था।
भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Polls MP) में मुकाबला समाप्त हो गया। इसके बाद भाजपा उम्मीदवार (Rajnish Agrawal) रजनीश अग्रवाल, (Tarun Chugh) तरुण चुग और (Mahesh Kewat) महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुने गए।
कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Supreme Court Verdict) के बाद कांग्रेस की कानूनी लड़ाई को बड़ा झटका लगा है। पार्टी पहले ही निर्वाचन आयोग और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग कर चुकी थी।
अब भाजपा ने मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर कब्जा कर लिया है, जबकि कांग्रेस इसे लोकतंत्र की हत्या और “सीट चोरी” बताती रही है।




