MP Promotion News: 9 साल बाद प्रमोशन का रास्ता साफ, दो लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत के संकेत

MP Promotion News: मध्य प्रदेश के करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। करीब नौ साल से रुकी पदोन्नति (Promotion) प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। महाधिवक्ता (Advocate General) की कानूनी राय मिलने के बाद राज्य सरकार ने सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि, कर्मचारियों को मिलने वाली सभी पदोन्नतियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।

MP Promotion News: मध्य प्रदेश के करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया अब दोबारा पटरी पर लौटती नजर आ रही है। लगभग नौ वर्षों से लंबित प्रमोशन को लेकर सरकार को महाधिवक्ता (Advocate General) की कानूनी राय मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) ने सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि आगे की प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो कर्मचारियों को पदोन्नति (Promotion) मिल सकती है, हालांकि यह न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।

कानूनी राय के बाद सरकार ने बढ़ाए कदम

सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 (MP Public Service Promotion Rules 2025) के संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन से कानूनी राय प्राप्त की थी। राय में स्पष्ट किया गया है कि इन नियमों को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं जरूर लंबित हैं, लेकिन अदालत की ओर से इनके क्रियान्वयन पर किसी प्रकार की अंतरिम रोक (Stay Order) नहीं लगाई गई है। ऐसे में वर्तमान नियम पूरी तरह प्रभावी हैं और इनके तहत पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

सभी विभागों और कलेक्टरों को भेजे गए निर्देश

महाधिवक्ता की राय मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को पत्र जारी किया है। इसमें कानूनी राय का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही विभागीय पदोन्नति समितियों (Departmental Promotion Committee – DPC) की बैठकें आयोजित की जा सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी किया गया उल्लेख

कानूनी राय में स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम विनय कुमार बबेले सहित सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि केवल किसी नियम को अदालत में चुनौती दिए जाने से सरकार पदोन्नति प्रक्रिया रोकने के लिए बाध्य नहीं होती। हालांकि, इस दौरान की गई सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय (Final Verdict) के अधीन रहेंगी।

मौखिक आश्वासन को नहीं माना गया कानूनी आधार

राय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं की शुरुआती सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से केवल मौखिक रूप से यह कहा गया था कि सुनवाई पूरी होने तक प्रमोशन नहीं किए जाएंगे। चूंकि यह बात किसी न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं बनी थी, इसलिए इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना जा सकता।

नई खंडपीठ करेगी मामले की सुनवाई

17 फरवरी 2026 को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन बाद में एक न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने और दूसरे न्यायाधीश के स्थानांतरण के कारण निर्णय नहीं आ सका। अब इस मामले की सुनवाई नई खंडपीठ (Division Bench) करेगी। ऐसे में अंतिम फैसला आने में अभी समय लग सकता है, जिससे सरकार को फिलहाल पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का कानूनी आधार मिल गया है।

दो लाख कर्मचारियों को मिल सकती है राहत

यदि सरकार कानूनी राय के अनुरूप आगे बढ़ती है तो करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों की वर्षों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन ही प्रभावी माने जाएंगे। ऐसे में कर्मचारियों के लिए यह राहत भरी खबर जरूर है, लेकिन अंतिम स्थिति न्यायालय के निर्णय के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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