भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 3,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। सरकार यह रकम एक साथ नहीं, बल्कि 1,000-1,000 करोड़ रुपये की तीन किश्तों में जुटाएगी। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की व्यवस्था के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी की जाएगी।
सरकार का कहना है कि यह उधारी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय की गई ऋण सीमा के भीतर है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के मुताबिक, इस कर्ज का इस्तेमाल पूंजीगत कामों में किया जाएगा, न कि वेतन, पेंशन या लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के नियमित खर्च में।
3,000 करोड़ रुपये कहां खर्च होंगे?
सरकार के मुताबिक, नए कर्ज की रकम को पूंजीगत परिसंपत्तियां यानी Capital Assets बनाने में लगाया जाएगा। इसमें सड़कें, पुल-पुलिया, सिंचाई परियोजनाएं, बांध, बिजली से जुड़े infrastructure, जमीन अधिग्रहण, स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़े निर्माण कार्य, सरकारी भवन और दूसरी विकास परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं। सरकार का तर्क है कि ऐसे कामों पर खर्च से infrastructure मजबूत होगा, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
वेतन और लाड़ली बहना में नहीं जाएगा पैसा
उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि इस कर्ज की रकम का इस्तेमाल वेतन-भत्ते, पेंशन, प्रशासनिक खर्च और लाड़ली बहना योजना जैसे नियमित राजस्व खर्चों के लिए नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि कर्ज लेकर बनाई जाने वाली पूंजीगत परिसंपत्तियां लंबे समय तक राज्य के काम आएंगी। इसी आधार पर सरकार इसे विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने से जोड़ रही है।
MP सरकार पर कितना है कर्ज?
मध्य प्रदेश सरकार पर पहले से ही बड़ा कर्ज है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक राज्य पर करीब 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपये का कुल कर्ज था। इसके बाद 2026-27 में भी सरकार ने लगातार बाजार से उधारी की है।
सितंबर 2026 में हुई नई उधारी के बाद कुछ रिपोर्टों में राज्य का कुल बकाया कर्ज करीब 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ रुपये बताया गया है। उसी दौरान चालू वित्त वर्ष में बाजार से ली गई उधारी का आंकड़ा करीब 53,900 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई थी। हालांकि, यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। कुल कर्ज और चालू वित्त वर्ष में लिया गया नया कर्ज एक ही आंकड़ा नहीं है। कुल कर्ज में पहले से ली गई उधारी भी शामिल होती है।
2026-27 के बजट में अनुमानित कर्ज
मध्य प्रदेश के 2026-27 के बजट में ऋण को लेकर अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं। बजट विश्लेषण के मुताबिक, ऋण चुकौती को छोड़कर कुल व्यय 3 लाख 88 हजार 923 करोड़ रुपये अनुमानित है। इसे पूरा करने के लिए ऋण को छोड़कर 3 लाख 17 हजार 465 करोड़ रुपये की प्राप्तियों और 71 हजार 753 करोड़ रुपये के शुद्ध ऋण का अनुमान रखा गया है।
वहीं बजट में कुल उधारी का आंकड़ा इससे अलग है। 2026-27 में कुल borrowings करीब 1 लाख 6 हजार 190 करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जिसमें केंद्रीय पूंजीगत ऋण भी शामिल हैं। इसलिए ₹71,753 करोड़ को राज्य की पूरी उधारी बताना सही नहीं होगा; यह शुद्ध उधारी का अनुमान है।
सरकार का तर्क- कर्ज से बनेगा infrastructure
सरकार का कहना है कि अगर उधार ली गई रकम सड़क, पुल, सिंचाई, बिजली, बांध और दूसरी पूंजीगत परियोजनाओं में लगाई जाती है तो इससे राज्य की infrastructure क्षमता बढ़ेगी। बजट के मुताबिक 2026-27 में मध्य प्रदेश ने 78,920 करोड़ रुपये के Capital Outlay का प्रावधान किया है। यह वह खर्च है जो नई परिसंपत्तियां बनाने या मौजूदा infrastructure को मजबूत करने से जुड़ा होता है।
सरकार का तर्क है कि ऐसे निवेश का असर लंबे समय में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक आर्थिक फायदा परियोजनाओं की गुणवत्ता, समय पर पूरा होने और उनके इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
नए 3,000 करोड़ रुपये के कर्ज को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार राज्य की बढ़ती उधारी को लेकर सरकार से जवाब मांगते रहे हैं। कांग्रेस का सवाल है कि अगर सरकार लगातार कर्ज लेकर विकास कार्यों पर खर्च कर रही है तो इसका असर राज्य में विकास और रोजगार के अवसरों पर भी दिखाई देना चाहिए। पार्टी सरकार से प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर अधिक पारदर्शिता की मांग करती रही है।
वहीं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सरकार पर तंज कसते हुए वित्त मंत्री के पद का नाम बदलकर ‘कर्ज मंत्री’ करने की बात कही। उन्होंने सरकार पर लगातार कर्ज बढ़ाने का आरोप लगाते हुए श्वेत पत्र की जगह ‘कर्ज पत्र’ जारी करने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं के ये बयान सरकार की आर्थिक नीतियों पर उनकी राजनीतिक आलोचना हैं। सरकार दूसरी ओर लगातार यह कह रही है कि उसकी उधारी तय सीमा के भीतर है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पूंजीगत कार्यों के लिए किया जा रहा है।




