भोपाल। मंत्रिपरिषद की एक बैठक सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के सबंध में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह कॉरिडोर पूरे महाकौशल क्षेत्र को नई औद्योगिक ताकत प्रदान करेगा। जबलपुर से शुरू होकर भोपाल होते हुए प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर तक विस्तारित होने वाला यह कॉरिडोर औद्योगिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देगा।
सीएम स्वयं करेगे मॉनिटरिंग, 100 करोड़ की दी राशि
सीएम ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई कंपनी का गठन किया गया है। यह कंपनी एक इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में कार्य करेगी और पूरी तरह राज्य शासन के स्वामित्व में होगी। राज्य शासन की ओर से इसके लिए 100 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है। इसकी गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता मैं स्वयं करूंगा, ताकि निर्णय तेजी से लिए जा सकें और सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ काम कर सकें। हमारी अन्य कंपनियों के संचालन से प्राप्त अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ भी इस परियोजना को मिलेगा, जिससे विकास कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
सीएम ने बताया कि यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र को औद्योगिक एवं आर्थिक रूप से विकसित करने की एक व्यापक योजना है। इसके प्रथम चरण में 3,000 से लेकर 10,000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है।
स्कूलों में परिवहन के 241 करोड़ खर्च करेगी सरकार
सीएम ने बताया कि प्रदेश सरकार विद्यालयों में परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 241 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। राज्य स्तर से परिवहन व्यवस्था के संचालन और रखरखाव में जिलों को होने वाली विभिन्न कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए हमने कलेक्टरों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। स्थानीय परिस्थितियों और दरों में होने वाले अंतर को ध्यान में रखकर जिला स्तर पर ही बसों के संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था की जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि जनजातीय क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) एवं अन्य क्षेत्रों के विद्यालयों में भी विद्यार्थियों को परिवहन की सुविधा उपलब्ध हो सके।
मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में नया कार्यालय
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश के नवगठित जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में महिला एवं बाल विकास विभाग के चार कार्यालय खोले जाने पर अपनी सहमति दे दी हैं, ताकि विभागीय योजनाओं का लाभ आमजन तक सुगमता से पहुंच सके और प्रशासनिक कार्यों को गति मिले। जल संसाधन विभाग के माध्यम से सिंचाई परियोजनाओं को निरंतरता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। बुरहानपुर और नगर सहित लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ ही रायसेन जिले के उदयपुरा और भोजपुर क्षेत्र की सिंचाई परियोजनाओं को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट ने इस पर भी लिया निणर्य
एमपी कैबिनेट ने इसके अतिरिक्त, सीतामऊ परियोजना के लिए लगभग 750 करोड़ की योजना तथा सिंगरौली क्षेत्र को लाभान्वित करने वाली 1,320 करोड़ की सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। सीएम ने बताया कि आयुष के क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार ने तेज गति से कार्य किया है। वर्ष 1916 में ग्वालियर में राज्य का पहला आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित हुआ था। इसके बाद सरकार बनने तक प्रदेश में सात आयुर्वेदिक कॉलेज थे। हमारी सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में 9 नए आयुर्वेदिक कॉलेजों को मंजूरी दी है, जो अब शुरू होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय आयुष मिशन अंतर्गत लगभग 1,698 करोड़ की योजना को निरंतर जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इन प्रयासों से प्रदेश में आयुष शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को और अधिक सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।




