रीवा। किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने रीवा जिलाधीश नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को किसानों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जिले का अन्नदाता वर्तमान में आवारा पशुओं, बिजली संकट और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण दोहरी मार झेल रहा है। ज्ञापन सौंपने वालों में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंखू, लालमणि त्रिपाठी, संतकुमार पटेल, फौजी यदुवंश प्रताप सिंह सहित मऊगंज और रीवा जिले के कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आवारा पशुओं और जंगली जानवरों द्वारा नष्ट की जा रही फसलों की ओर आकर्षित किया। किसान नेताओं ने कहा कि राजस्व विभाग और फसल बीमा योजना से कोई सहायता न मिलने के कारण किसान आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। उन्होंने मांग की कि सिरमौर जनपद की ग्राम पंचायत तिलखन में किसानों द्वारा निजी स्तर पर की गई बाड़ेबंदी को मॉडल मानते हुए सरकार पूरे जिले में बाड़ेबंदी का खर्च वहन करे या इसके लिए पंचायतों को अतिरिक्त बजट आवंटित किया जाए।
बिजली संकट को लेकर भी किसान नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में किसानों को घोषित 10 घंटे बिजली नहीं मिल रही है। बिजली विभाग की लापरवाही के कारण समय पर ट्रांसफार्मर और केबल नहीं बदले जा रहे, जिससे मोटरें खराब हो रही हैं और फसलें जल रही हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि विभागीय सुस्ती से हुए नुकसान की भरपाई स्वयं बिजली विभाग करे और किसानों से वसूले जा रहे मनमाने बिजली बिलों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग में आ रही तकनीकी दिक्कतों और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक ठोस सुझाव दिया गया। किसान नेताओं ने मांग की कि जिस प्रकार जिला मुख्यालय पर जनसुनवाई होती है, उसी तर्ज पर प्रत्येक माह में दो बार कृषि मंडियों में विशेष जनसुनवाई आयोजित की जाए। इससे किसानों को अपनी समस्याओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और मौके पर ही शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित हो सकेगा।




