MP: अब गांवों से दिखेगी आकाशगंगा, मध्य प्रदेश में शुरू होगा एस्ट्रो-टूरिज्म, 6 गांव बने अंतरिक्ष दर्शन के केंद्र

MP Tourism News: मध्य प्रदेश में पहली बार एस्ट्रो-टूरिज्म (Astro Tourism) की शुरुआत होने जा रही है। इसके तहत पर्यटन विभाग ने छह ग्रामीण पर्यटन स्थलों का चयन किया है, जहां पर्यटक टेलीस्कोप की मदद से आकाशगंगा, ग्रहों, उपग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों का रोमांचक नजारा देख सकेंगे। परियोजना को सफल बनाने के लिए गुजरात की विशेषज्ञ एजेंसियां स्थानीय युवाओं को खगोल विज्ञान (Astronomy) और टेलीस्कोप संचालन का प्रशिक्षण दे रही हैं। वहीं प्रत्येक चयनित गांव में स्टार गेजिंग (Star Gazing) के लिए विशेष प्लेटफॉर्म, आधुनिक टेलीस्कोप और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे ग्रामीण पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा।

MP Tourism News: मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग राज्य में पर्यटन को नया आयाम देने जा रहा है। अब पर्यटक सिर्फ जंगल सफारी, ऐतिहासिक धरोहरों और ग्रामीण संस्कृति का ही नहीं, बल्कि रात के आसमान में आकाशगंगा, ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों का भी नजदीक से अवलोकन कर सकेंगे। प्रदेश में पहली बार एस्ट्रो-टूरिज्म (Astro Tourism) परियोजना शुरू की जा रही है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्टार गेजिंग (Star Gazing) की विशेष सुविधा विकसित की जाएगी।

पहले चरण में छह गांवों का चयन

परियोजना के प्रथम चरण में प्रदेश के छह गांवों को शामिल किया गया है। इनमें दमोह का रिचकुड़ी, धार का ज्ञानपुरा, छिंदवाड़ा का धुसवानी, बैतूल का बंचा, नर्मदापुरम का धाबा और उमरिया का रांचा गांव शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर पहले से ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) और होम स्टे (Home Stay) जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे पर्यटकों को एक समग्र पर्यटन अनुभव मिल सकेगा।

स्थानीय युवाओं को बनाया जाएगा एस्ट्रो-गाइड

परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल ने गुजरात की दो विशेषज्ञ एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है। चयनित गांवों के युवाओं को खगोल विज्ञान (Astronomy) और टेलीस्कोप संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद यही युवा एस्ट्रो-गाइड (Astro Guide) के रूप में पर्यटकों को अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारियां देंगे और स्टार गेजिंग साइट्स का संचालन करेंगे।

अक्टूबर-नवंबर से शुरू हो सकती है सुविधा

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष अक्टूबर-नवंबर तक कुछ गांवों में यह सुविधा शुरू होने की संभावना है। प्रत्येक गांव में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से आवश्यक ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके तहत टेलीस्कोप, देखने के प्लेटफॉर्म, बैठने की व्यवस्था और अन्य आधुनिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे।

क्यों खास हैं ये चयनित गांव


रिचकुड़ी (दमोह)

यह गांव अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां से 10वीं-11वीं शताब्दी की कुबेर प्रतिमा प्राप्त हुई थी। आसपास रानी दुर्गावती बाघ अभयारण्य, सिंगोरगढ़ किला और निदान कुंड जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल मौजूद हैं।

ज्ञानपुरा (धार)

हरे-भरे वातावरण से घिरा यह गांव प्रसिद्ध भोजशाला से करीब तीन किलोमीटर और ऐतिहासिक मांडू से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है।

धुसवानी (छिंदवाड़ा)

तामिया पर्यटन क्षेत्र के निकट स्थित यह गांव गोंड और भारिया जनजातीय संस्कृति, लोककला तथा पारंपरिक शिल्प के लिए प्रसिद्ध है।

बंचा (बैतूल)

घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा यह गांव घुघरा और मछना नदियों के संगम पर स्थित है। यहां से बालाजीपुरम मंदिर और ताप्ती नदी के उद्गम स्थल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

धाबा (नर्मदापुरम)

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई प्रवेश द्वार के पास स्थित यह गांव नर्मदा और तवा नदियों के संगम क्षेत्र में आता है। तवा जलाशय भी यहां का प्रमुख आकर्षण है।

रांचा (उमरिया)

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के निकट स्थित यह गांव पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के बीच पहले से लोकप्रिय है। यहां जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण का अवसर मिलता है।

ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

अब तक ग्रामीण पर्यटन के तहत आने वाले पर्यटक बैलगाड़ी की सवारी, खेतों का भ्रमण, स्थानीय व्यंजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते थे। नई एस्ट्रो-टूरिज्म (Space Tourism Experience) पहल के बाद उन्हें रात के समय तारों भरे आकाश और अंतरिक्ष की अद्भुत दुनिया को करीब से देखने का अवसर भी मिलेगा। मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. के अनुसार हर मौसम में आकाश का दृश्य बदलता रहता है। ऐसे में पर्यटकों को प्रत्येक यात्रा के दौरान कुछ नया देखने और सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे राज्य में पर्यटन गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

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