भोपाल। एलपीजी का समस्या से निपटने के लिए एमपी प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है और गैंस एजेंसियों पर शिकजा कसा जा रहा है। प्रदेश के मुख्य सचिव ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी किसी भी कीमत में बर्दाश्त नही की जाएगी। अगर ऐसी स्थित पाई जाती है तो संबधित के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए एजेंसियों के निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम सख्ती से लागू
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता व पीएनजी कनेक्शन को लेकर समीक्षा बैठक किए है। जिस पर उन्होने प्रदेश में एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के साथ भारी अर्थदंड और एजेंसियों पर आवश्यक होने पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए है। उन्होने कहा है कि गड़बड़ी करने वालों को किसी भी सूरत में न छोड़ें।
अब तक दर्ज हुई 11 एफआईआर
समीक्षा बैठक के दौरान वर्चुअली बैठक में शामिल हुए प्रदेश के कलेक्टर एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 3,029 गैस सिलिंडर जब्त किए गए हैं। 2,759 छापे मारे गए हैं। दोषियों के विरुद्ध 11 एफआइआर भी दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने संतोष जताया है कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की कमी नहीं है।
प्रशासन की सख्ती के मुख्य बिंदु
- दैनिक मॉनिटरिंग: कलेक्टरों को स्टॉक की उपलब्धता की लगातार समीक्षा करने और कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
- लाइसेंस रद्दीकरण: गड़बड़ी मिलने पर सीधे गैस एजेंसी का लाइसेंस रद (Cancel) करने की चेतावनी दी गई है।
- छापेमारी और जब्ती: पूरे प्रदेश में, विशेषकर अनधिकृत भंडारण वाले स्थानों पर प्रशासन की छापेमार कार्रवाई जारी है।
- पर्याप्त स्टॉक का आश्वासन: प्रदेश के 11 बॉटलिंग प्लांटों और वितरकों के गोदामों में गैस का पर्याप्त स्टॉक है; लोगों से पैनिक बुकिंग न करने की अपील की गई है।
- व्यावसायिक उपयोग पर नजर: घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक (Commercial) उपयोग करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
उपभोक्ताओं के लिए निर्देश:
- घरेलू उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे आखिरी रिफिल के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग करें।
- अफवाहों से बचें, क्योंकि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है।
