मानसून। देश भर में मानसून का असर अब कम होने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में आज से यानि की 19 सिंतबर से मानसून की वापसी शुरू हो गई हैं, हांलाकि इस वर्ष तय समय के दो दिन की देरी से मानसून की वापसी शुरू हो रही है। इसके बाद यह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और मध्य प्रदेश से धीरे-धीरे पीछे हटेगा, फिर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों से मानसून कमजोर होते हुए पूरे देश से विदा होगा। इस बार मानसून सीजन के दौरान देश भर में कुल बारिश सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।
यूपी में 22 से विदाई
मौसम विभाग के अनुसार यूपी में 22 सितंबर से बारिश की गतिविधियां रुकने की संभावना है। हालांकि, कुछ हिस्सों में अब भी बाढ़ जैसे हालात हैं। राज्य के गोंडा में घाघरा नदी के जलस्तर में कमी आने से कुछ राहत मिली है, लेकिन 15 गांवों में करीब 10 हजार लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। कई घरों और आसपास के इलाकों में पानी भरा हुआ है।
दो दिन विलंब से मानसून की विदाई
मौसम विभाग के अनुसार मानसून के विदाई की सामान्य तिथि 17 सितंबर है, जबकि इस वर्ष दो दिन की देरी से, 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान (जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) से मानसून का लौटना शुरू हुआ है। राजस्थान के बाद अगले हफ्ते तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों से भी मानसून के पीछे हटने की संभावना है। दिल्ली से इसके 25 सितंबर तक विदा होने का अनुमान है।
मानसून, विदाई का देता है ऐसे संकेत
आईएमडी के अनुसार मानसून विदाई तय डेट पर हो यह संभव नही है। मौसम का मिजाज और मानसून की गतिविधि यह संकेत देती है कि अब मानसून की वापसी शुरू हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार 5 दिनों तक बारिश न होना, हवा में नमी कम होना और हवाओं का रुख बदलना मानसून की वापसी का संकेत होता है।
कुछ हिस्सों में बारिश के संकेत
हांलाकि विदाई के संकेत के बावजूद, उत्तर-पश्चिम, पूर्वाेत्तर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों में हल्की से भारी बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। कुछ पहाड़ी और मैदानी इलाकों में अभी भी भारी बारिश का दौर बना हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
फिर बनेगी बारिश की स्थित
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारत के तमिलनाडु (कोरोमंडल तट) भाग में लौटते हुए मानसून (उत्तर-पूर्वी मानसून) के कारण वर्षा होती है। यह वर्षा आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के महीनों के बीच होती है। उसकी वजह हवाएं स्थल से समुद्र की ओर (उत्तर-पूर्व दिशा से) बहती हैं और बंगाल की खाड़ी से नमी प्राप्त करके इस क्षेत्र में वर्षा करती हैं।




