Minakshi Natrajan on Rahul Gandhi : कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने का मामला अब इतना जटिल हो गया है कि यह पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी और साजिश का सवाल बन गया है। इस मामले में कई बातें सामने आई हैं कि आखिर वह कौन था जिसने कांग्रेस की रणनीति और दस्तावेज भाजपा तक पहुंचाए। यह सवाल अब पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बन गया है।
नामांकन रद्द होने का कारण क्या था?
मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस की ओर से मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने की तैयारी थी। लेकिन नामांकन के वेरिफिकेशन के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने उनका नामांकन रद्द कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, उनके दाखिल हलफनामे में जरूरी जानकारी अधूरी थी, खासतौर पर फॉर्म-26 में एक शिकायत का जिक्र नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसला से राजनीतिक हलचल
मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और नामांकन बहाल करने की अपील की। लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राजनीतिक माहौल गरम हो गया और पार्टी के अंदर से ही सवाल उठने लगे कि यह जानकारी आखिर कैसे भाजपा तक पहुंची।
डॉक्यूमेंट्स कैसे पहुंचे?
कहानी तब और उलझ गई जब कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि नटराजन के खिलाफ इस्तेमाल हुई जानकारी तेलंगाना से मध्य प्रदेश तक एक सुनियोजित चैनल के जरिए पहुंचाई गई। यह जानकारी एक प्रभावशाली कांग्रेस नेता के बेटे तक पहुंची, जो उनके करीबी मित्र भी हैं। फिर यह दस्तावेज उस नेता तक पहुंचा और वहीं से भाजपा के पास चला गया।
राहुल गांधी की नाराजगी का कारण क्या?
मध्य प्रदेश के एक नेता का कहना है कि असली नाराजगी राहुल गांधी के फैसले को लेकर थी। कई नेताओं को यह भी नहीं भाया कि उम्मीदवार चयन में उनसे सलाह-मशविरा नहीं किया गया। इन नाराजगी और गुटबाजी ने पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को जटिल बना दिया है।
क्या पार्टी के अंदर ही हो रही है खींचतान?
यह मामला केवल एक राज्यसभा सीट का नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की ताकत का भी सवाल है। यदि पार्टी के भीतर से ही अहम सूचनाएं बाहर जा रही हैं, तो यह संगठन की कमजोरी का संकेत है।




