महाबली ट्रकः आखिर क्यों हो रही इसकी चर्चा…मशीन की खास बात

यूपी। देश भर में इन दिनों महाबली ट्रक की चर्चा बहुत ही तेजी से हो रही है। शोसल मीडिया में यह ट्रक छाया हुआ है। लोग इस ट्रक का वीडियों बनाकर वायरल कर रहे है। जिस रास्ते से यह ट्रक गुजरता है, वहां देखने वालो और सेल्फी लेने वालों की न सिर्फ भीड़ पहुच रही है बल्कि उक्त क्षेत्र का प्रशासन इस महाबली ट्रक की व्यवस्था में लग रहा है। जानकारी के तहत इस ट्रक में 308 पहिये लगे हुए है। यह ट्रक एक दिन में 20 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है। महाबली ट्रक करोड़ों का डीजल खर्च करके अपनी यात्रा पूरी कर पाऐगा।

यूपी मशीन लेकर जा रहा महाबली

ओडिशा के पारादीप पोर्ट से उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जा रहा 308 पहियों वाला विशालकाय मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर बेल्जियम से समुद्री रास्ते से लाई गई करीब 200 टन वजनी भारी-भरकम मशीन (वैक्यूम बॉयलर,रिएक्टर) लदी हुई है । अत्यधिक वजन और विशाल आकार (लगभग 100 फीट लंबाई) के कारण यह ट्रक रोजाना सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पाता है। महीनों से चल रहे इस लंबे सफर में करोड़ रुपये का डीजल खर्च हो रहा है।

शामिल है तकनीकी टीम

इस सफर को सुरक्षित बनाने के लिए 64 से अधिक कर्मचारियों व तकनीकी विशेषज्ञों की टीम, 2 भारी क्रेन, 2 अतिरिक्त ट्रेलर और आगे चलने वाली पायलट गाड़ियां लगातार साथ चल रही हैं। इतने विशालकाय वाहन को जब भी किसी शहर या हाईवे से गुजारा जाता है, तो स्थानीय प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीमें पहले से ही रूट का जायजा लेती हैं ताकि जाम या दुर्घटना की स्थिति न बने। जहां से भी यह ट्रक गुजरता है, इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।

वाराणसी पहुचा महाबलि

308 पहियों वाला महाबली ट्रक इस समय उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) क्षेत्र में सफर कर रहा है। इस ट्रक का आधिकारिक और तय रूट केवल चार राज्यों से है। जिसमें ओडिशा, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश पहुच रहा और यहां के बलरामपुर में उक्त मशीन को पहुचाऐगा।

मशीन की खास बात

इस महाबली ट्रक पर जो मशीन लदी है, वह कोई सामान्य ट्रांसफार्मर या बॉयलर नहीं, बल्कि एक सायक्लाजेसन रिएक्टर (Cyclazation Reactor) है।

  1. देश का पहला बायोप्लास्टिक प्लांट: इस मशीन को लखीमपुर खीरी के कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल द्वारा बनाए जा रहे देश के पहले और सबसे बड़े बायोपॉलीमर (बायोप्लास्टिक) प्लांट में स्थापित किया जाएगा।
  2. पर्यावरण के अनुकूल तकनीक: इस रिएक्टर की मदद से गन्ने के अवशेषों (मैसेज/खोई) और चीनी उत्पादन के सह-उत्पादों का उपयोग करके ऐसी प्लास्टिक बनाई जाएगी जो पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल (प्रकृति में खुद नष्ट होने वाली) होगी।
  3. विशाल आकार: यह औद्योगिक मशीन अकेले करीब 41 मीटर लंबी और 8 मीटर ऊंची है, जिसे पूरी सुरक्षा के साथ बेल्जियम से यूपी तक पहुंचाया जा रहा है।

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