रीवा। रीवा के नगर-निगम महापौर का कार्यालय कक्ष बुधवार को तब चर्चा में आ गया। जब बीजेपी के पार्षद लामबंद हो गए। वे कक्ष के बाहर नारेबाजी करने लगे। भाजपा पार्षदों ने इस दौरान महापौर अजय मिश्रा बाबा से स्तीफा की मांग किए है। भाजपा पार्षदों के इस आंदोलन को चलते कार्यालय परिसर में गहमा-गहमी का माहौल बना रहा है।
इस तरह का आरोप
बीजेपी पार्षदों ने विरोध प्रर्दशन करते हुए आरोप लगाए है कि नगर निगम महापौर अजय मिश्रा द्वारा महापौर कक्ष में 22 लोगों को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई है। भाजपा पार्षदों और परिषद के नेता प्रतिपक्ष दीनानाथ वर्मा ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे शासकीय कार्यालय का राजनीतिक उपयोग बताया। भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर निगम कार्यालय प्रशासनिक कार्यों के लिए है और वहां किसी राजनीतिक दल की सदस्यता दिलाना नियमों और नैतिकता के विपरीत है।
मांगा स्तीफा
नेता प्रतिपक्ष दीनानाथ वर्मा ने महापौर से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग भी की। इसके साथ ही भाजपा पार्षदों ने नगर निगम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद नगर निगम की राजनीति गरमा गई है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
विवाद का मुख्य कारण
- सरकारी परिसर का राजनीतिक उपयोग: मंगलवार शाम को रीवा नगर निगम के सरकारी महापौर कक्ष में वैश्य समाज के 15 से अधिक पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई थी। महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ ने स्वयं उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई।
- भाजपा की आपत्ति: भाजपा नेताओं और पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम कार्यालय एक प्रशासनिक और शासकीय स्थल है। इस तरह के सरकारी परिसर का उपयोग किसी भी राजनीतिक दल के व्यक्तिगत या संगठनात्मक प्रचार (सदस्यता अभियान) के लिए किया जाना पूरी तरह नियम विरुद्ध और अनैतिक है।
भाजपा का कदम और मांगें
- कमिश्नर को ज्ञापन: भाजपा के नेता प्रतिपक्ष दीनानाथ वर्मा के नेतृत्व में पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन को आधिकारिक शिकायत पत्र और ज्ञापन सौंपा है।
- इस्तीफे और जांच की मांग: भाजपा ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए कि आखिर शासकीय कक्ष में राजनीतिक गतिविधियां कैसे संचालित होने दी गईं। इसके साथ ही भाजपा ने नैतिक आधार पर महापौर के इस्तीफे (स्तीफा) की भी मांग उठाई है।




