रीवा जिले की तहसील हुजूर क्षेत्र में एक पारिवारिक विवाद का सुखद और संवेदनशीलता से भरा अंत देखने को मिला है। बुजुर्ग पिता श्यामलाल वर्मा द्वारा अपने ही पुत्रों के विरुद्ध मारपीट और भरण-पोषण को लेकर प्रस्तुत किए गए आवेदन पर त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी ने दोनों पक्षों के बीच सफल सुलह कराई है। इस प्रशासनिक पहल से जहां एक तरफ बुजुर्ग पिता को कानूनी व सामाजिक सुरक्षा मिली है, वहीं परिवार में फिर से आपसी सौहार्द बहाल हुआ है।
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रार्थी श्यामलाल वर्मा ने अपने पुत्रों के व्यवहार से परेशान होकर प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत औपचारिक प्रकरण पंजीबद्ध किया। इसके बाद एसडीएम हुजूर द्वारा मामले से जुड़े अनावेदक पुत्रों दीपक सोंधिया एवं सुनील सोंधिया को आधिकारिक नोटिस जारी कर दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए तलब किया गया था।
एसडीएम की समझाइश से बनी सहमति, पुत्रों को दी गई कड़े निर्देश
निश्चित तिथि पर आयोजित सुनवाई के दौरान एसडीएम डॉ. अनुराग तिवारी ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनकी पूरी बात सुनी और पारिवारिक दायित्वों का बोध कराया। समझाइश के दौरान एसडीएम ने अनावेदक पुत्रों को सख्त हिदायत दी कि वे अपने बुजुर्ग पिता के पर्याप्त भरण-पोषण, बीमारी की स्थिति में दवाइयों व समुचित उपचार की पूरी जिम्मेदारी उठाएं। साथ ही, उनके साथ हमेशा सद्भावना, आदर और सम्मानपूर्वक व्यवहार करना सुनिश्चित करें। प्रशासन की इस न्यायसंगत और मानवीय पहल का सकारात्मक असर हुआ, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से सुलह हो गई। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जिले के वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों के अनुरूप संरक्षण दिलाना और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।




