आगर-मालवा। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद देश भर के मंदिरों में चढ़ावा को लेकर चर्चा हो रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की नलखेड़ा तहसील में लखुंदर नदी के किनारे स्थित पीतांबरा सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर में भक्तों के द्वारा दिए जाने वाले दान में गड़बड़ी होने की शिकायत सामने आई है। इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ने जहा जांच के आदेश दिए है वही जिले की कलेक्टर ने जांच कमेटी बैठाई है। जिससे मंदिर में पहुचने वाले दान का हिसाब-किताब हो सकें।
प्रमुख शक्तिपीठों और तंत्र साधना स्थलों में सुमार
मध्यप्रदेश का यह पीतांबरा सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों और तंत्र साधना स्थलों में सुमार है। धार्मिक ग्रंथों में मां बगलामुखी के स्वरूप और महिमा का उल्लेख मिलता है। देश में मां बगलामुखी के केवल तीन प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने जाते हैं। इनमें मध्य प्रदेश के दतिया, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मंदिर का नाम प्रमुख है। तीनों शक्तिपीठों की अपनी अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। इस मंदिर में माता रानी के दर्शन और साधना एवं तांत्रिक दर्शन के लिए देश ही नही विदेशों से भी श्रद्धालु पहुचते है। ऐसी मान्यता है कि मां बगलामुखी की पूजा-साधन से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
महाभारत से जुड़ी है मान्यता, पहुचते है राजनेता और स्टार
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त करने के लिए इसी स्थान पर मां बगलामुखी की साधना की थी। तभी से यह सिद्धपीठ विजय, शत्रु बाधा निवारण और मनोकामना पूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मां बगलामुखी की आराधना से शत्रुओं का स्तंभन होता है और न्यायालयीन विवाद, चुनावी सफलता तथा कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। यही वजह है कि यहां आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ न्यायपालिका से जुड़े लोग, राजनेता, उद्योगपति, फिल्म जगत की हस्तियां और अन्य विशिष्ट लोग भी विशेष हवन, पूजन और अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं।
इस तरह के आरोप
आरोप है कि मंदिर परिसर में एक गैर-शासकीय समिति द्वारा श्रद्धालुओं से नकद, सोना और चांदी के रूप में दान लिया जा रहा था। यह भी आरोप है कि दान की गई राशि और कीमती सामान को आधिकारिक सरकारी ट्रस्ट के बजाय निजी बैंक खातों और संस्थाओं के पास जमा किया जा रहा था। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर प्रीति यादव ने तीन सदस्यीय जांच दल बनाया है। समिति की रिर्पोट पर अगली कार्रवाई तय होगी।
समिति बता रही पाक-साफ, भक्त नाराज
निजी समिति के सदस्यों का दावा है कि उनके द्वारा एकत्र किए गए दान का उपयोग मंदिर के रजत सुंदरीकरण (चांदी के काम) के लिए किया जा रहा था और उसका पूरा रिकॉर्ड रखा गया है, जबकि दान विवाद को लेकर भक्तों में काफी नाराजगी देखने में आ रही है।“श्रद्धालु मंदिर के दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।




