Madhya Pradesh Uniformed Civil Code Draft: 20 जुलाई 2026… यह तारीख मध्य प्रदेश की न्याय व्यवस्था और विधायी इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज होने वाली है. जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC Madhya Pradesh) पर दशकों से देशभर में बहस होती रही, उसे अब मध्य प्रदेश विधानसभा के पटल पर रखा जाने वाला है। UCC विधेयक पारित होते ही मध्य प्रदेश उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन जाएगा।
रविवार को मुख्य मंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में UCC विधेयक 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई है. सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद उस पर चर्चा होगी और सदन की मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बैठक के बाद सीएम यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, दौरान उन्होंने UCC को लेकर कहा कि समानता भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है.
इस दौरान सीएम यादव ने कहा कि हम ऐसा कानून ला रहे हैं जिसमे राम-रहीम-रविंदर और रोबिन सब एक समान हैं. सीएम ने इस दौरान कांग्रेस पर जुबानी हमला बोला- उन्होंने कहा कि UCC की बैठक में कांग्रेस के लोग नहीं आए, पता नहीं कांग्रेस को हिन्दू-मुस्लमान के वोट में क्या दीखता है? उन्होंने कहा कि- 80% से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं UCC लागू करने के पक्ष में है.
तलाक तलाक तलाक बोलकर डाइवोर्स नहीं
सीएम ने UCC के 4 पिलर्स के बारे में बताया। पहला बहुविबाह पर रोक! तलाक तलाक तलाक बोलकर डाइवोर्स नहीं होगा! संपत्ति के उत्तराधिकारियों में महिला और पुरुषों को बारबार का अधिकार मिलेगा। लिव इन में रहने वाले कपल्स को रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। और सबसे जरूरी है विवाह की आयु, जो सभी धर्मों के लोगों पर लागु होगी, महिलाओं के लिए कम से कम 18 और पुरुषों के लिए कम से कम 21.
आदिवासी UCC से बाहर
बता दें कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों के साथ साथ घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है जबकि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक जनजातीय आबादी वाला राज्य है, जहां कुल आबादी का करीब 21% हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। कमेटी का तर्क है कि इन समुदायों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना जरूरी है। संविधान भी अनुसूचित जनजातियों को अपने प्रचलित रीति-रिवाजों और परंपरागत कानूनों के पालन की विशेष सुरक्षा देता है।
UCC में लिवइन पार्टनर्स के लिए कानून
बात करें लिव इन से जुड़े कानून को लेकर तो यह हर लिव-इन कपल को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। जिस्ट्रेशन होते ही इलाके के थाने और कपल के माता-पिता को इसकी आधिकारिक सूचना भेजी जाएगी। अगर रजिस्ट्रेशन नहीं है तो पड़ोसी, स्थानीय लोग या मकान के मालिक शिकायत कर सकते हैं और सबसे जरूरी अगर किसी कपल ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है या अपनी गलत पहचान बताई है तो उसे 3 महीने तक की जेल हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति शादीशुदा है और लिव में भी रहता है तो उसे 5 साल तक की सज़ा हो सकती है। और सबसे बड़ी बात पुरुष अगर अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़कर जाता है, तो उसे महिला को भरण-पोषण देना पड़ सकता है। रजिस्टर्ड लिव-इन से पैदा हुए बच्चे कानूनी रूप से पूरी तरह वैध माने जाएंगे। उन्हें माता-पिता का नाम और पहचान भी कानूनी तौर पर मिलेगी। दोनों की पैतृक और खुद कमाई हुई संपत्ति में बराबर अधिकार मिलेगा।




