रीवा जिले में लगातार हो रही बारिश के थमने और राहत भरी खबर सामने आने के बाद शहरवासियों ने चैन की सांस ली है। बीहर और बिछिया नदियों के जलस्तर में तेजी से गिरावट आने के कारण शहर के कई प्रमुख हिस्सों में स्थिति सामान्य होने लगी है।
जलभराव से राहत और सुचारू आवागमन
- प्रमुख मार्गों पर आवागमन बहाल: गुरुवार रात 12 बजे के बाद से बीहर और बिछिया दोनों नदियों का जलस्तर तेजी से घटा है। इससे गोविंदगढ़ और गड्ढी रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भरा पानी काफी हद तक कम हो गया है और यातायात सुचारू हो गया है।
- प्रशासन की सतर्कता: हालांकि नदियों का बहाव अभी सामान्य से थोड़ा अधिक है, लेकिन पुलों तक पहुंचने वाले मार्गों से पानी पूरी तरह निकल चुका है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन और स्थानीय टीमें पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद हैं।
- लक्ष्मण बाग क्षेत्र: बिछिया नदी के पास स्थित लक्ष्मण बाग के गेट अभी भी पानी में डूबे हुए हैं, और वहां का जलस्तर पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा समय लग सकता है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता, 21 और 22 अगस्त को अवकाश
- कलेक्टर का निर्देश: बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 21 और 22 अगस्त को सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश घोषित किया है।
- कर्मचारियों की उपस्थिति: यह अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए है। शिक्षक और अन्य कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहकर प्रशासनिक और विद्यालयीन कार्य सुचारू रूप से पूरे करेंगे।
- परीक्षाओं पर स्थिति स्पष्ट: प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में इन दो दिनों में पहले से परीक्षाएं निर्धारित हैं, वे परीक्षाएं अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही संचालित की जाएंगी। यह निर्णय अतिवृष्टि और मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए लिया गया है।
बाढ़ का पानी उतरते ही जिंदगी को पटरी पर लाने में जुटे लोग
- घरों की सफाई और बहादुरी: बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी उतरते ही स्थानीय निवासी अपने घरों की सफाई और गृहस्थी संवारने में जुट गए हैं। लोग बाल्टी और पंप की मदद से कमरों में भरा पानी बाहर निकाल रहे हैं।
- सामान को सुखाने का काम: घरों के भीतर रखे भीगे हुए बिस्तर, फर्नीचर, बर्तन और अन्य जरूरी सामानों को धूप में सुखाया जा रहा है। बाढ़ की भयंकर तबाही के बावजूद शहरवासियों का हौसला कम नहीं हुआ है और वे पूरी हिम्मत के साथ अपनी दिनचर्या को दोबारा सामान्य बनाने में जुटे हैं।




