लखीसराय अशोकधाम भगदड़: अफवाह, अफरा-तफरी और 7 महिलाओं की मौत

Bihar

बिहार के लखीसराय जिले से सावन के तीसरे सोमवार पर एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। भगवान शिव के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु अशोकधाम मंदिर पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में श्रद्धा का माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया।

भगदड़ में 7 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 23 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इनमें से 3 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।आखिर इतने बड़े हादसे की शुरुआत कैसे हुई? क्या सच में करंट फैला था या सिर्फ एक अफवाह ने लोगों की जान ले ली? आइए पूरी घटना को शुरुआत से समझते हैं।

अशोकधाम मंदिर में उमड़ी थी भारी भीड़

सावन का तीसरा सोमवार था। अशोकधाम मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ रही थी। प्रशासन के मुताबिक करीब 50 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे।

मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई थीं। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइन बनाई गई थी और बैरिकेडिंग भी की गई थी।

सुबह करीब साढ़े छह बजे के आसपास अचानक माहौल बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मंदिर जाने वाले रास्ते के पास एक खंभा गिर गया। इसके बाद भीड़ में यह बात फैल गई कि बिजली का तार टूट गया है और करंट फैल गया है। लोगों में डर बैठ गया और जान बचाने के लिए भागदौड़ शुरू हो गई।

खंभा गिरा, करंट की अफवाह फैली

हालांकि बाद में लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने साफ किया कि कोई बिजली का चालू तार नहीं गिरा था। वहां केवल एक केबल वायर यानी इंटरनेट या डिश का तार था।

लेकिन तब तक अफवाह पूरे इलाके में फैल चुकी थी। लखीसराय डीएम शैलेंद्र कुमार के मुताबिक खंभा पुरुषों की लाइन की तरफ गिरा था। अफवाह फैलते ही पुरुषों की तरफ से भीड़ का दबाव महिलाओं की लाइन पर आ गया। धक्का-मुक्की शुरू हुई और कई महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिर गईं। कुछ ही मिनटों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

अफवाह के बाद मची भगदड़

मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि लोग चिल्ला रहे थे कि करंट आ गया है, करंट आ गया है। इसी डर में लोग बैरिकेडिंग तोड़कर भागने लगे। कई लोग सड़क से नीचे खेतों की तरफ गिर गए। हर तरफ चीख-पुकार मच गई। एक घायल महिला ने बताया कि वह सुबह पांच बजे घर से पूजा करने निकली थी। मंदिर की लाइन एक किलोमीटर से ज्यादा लंबी थी। तभी पोल गिरने और करंट फैलने की बात सुनाई दी। इसके बाद लोग तेजी से भागने लगे और भगदड़ मच गई।

मिनटों में मातम में बदली श्रद्धा

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी महिला ने बताया कि पीछे से अचानक जोर का धक्का आया। लोग गिरने लगे और कई महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर दब गईं। वह खुद भी बेहोश हो गई थीं। हादसे के बाद का दृश्य बेहद दर्दनाक था। श्रद्धालुओं के चप्पल, बैग, पूजा सामग्री और दूसरे सामान रास्ते में बिखरे पड़े थे।

घायल लोगों को स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से एंबुलेंस के जरिए सदर अस्पताल पहुंचाया गया। इस हादसे में जान गंवाने वाली चार महिलाओं की पहचान हो चुकी है। इनमें लखीसराय की मधुबाला देवी, मनमाला देवी, हेमलता देवी और मुंगेर की रिंकू देवी शामिल हैं। बाकी मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

घायलों में लखीसराय, पटना और आसपास के जिलों के कई श्रद्धालु शामिल हैं। खबर लिखे जाने तक जानकारी है की 23 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और तीन लोगों को गंभीर हालत में बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।

हादसे के बाद बिहार सरकार हरकत में आ गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया। वहीं मंत्री विजय सिन्हा और अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और बताया की अफवाह फैला कर भगदड़ मचवाई गई है और ऐसा माहौल बनवाने वालो को चिन्हित भी किया जायेगा।

PM मोदी, राष्ट्रपति मुर्मू ने जताया दुख

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि लखीसराय में भगदड़ के कारण हुई जनहानि से वे बेहद दुखी हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस घटना को बेहद पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

इस बीच बिहार सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मंत्री केदार गुप्ता ने कहा है कि हादसे की वजहों की जांच होगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

गौर करने वाली बात यह है कि बिहार में मंदिरों में भगदड़ की यह पहली घटना नहीं है। इसी साल मार्च महीने में नालंदा के मघड़ा शीतला मंदिर में भी भगदड़ मची थी, जिसमें 9 लोगों की मौत हुई थी। अब एक बार फिर अशोकधाम मंदिर में हुआ यह हादसा कई सवाल खड़े कर रहा है।

इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे? क्या अफवाहों को रोकने के लिए कोई तंत्र मौजूद था? और अगर समय रहते स्थिति संभाल ली जाती तो क्या इन सात महिलाओं की जान बचाई जा सकती थी?

फिलहाल अशोकधाम मंदिर में फिर से जलाभिषेक शुरू हो चुका है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके लिए यह सावन कभी नहीं भूलने वाला है।

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