तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी उठापटक के बीच पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) के तेवर नरम पड़ते दिखाई दिए हैं। कुछ दिन पहले अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) पर तीखा हमला करने वाले कल्याण ने अब कहा है कि अभिषेक उनके बेटे जैसे हैं और बेटे की गलतियों को माफ करना एक पिता का कर्तव्य होता है।
दरअसल, 11 जून को कल्याण बनर्जी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को तय करना होगा कि वे उनके साथ हैं या अभिषेक के साथ। उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिषेक वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं करते और उनके अहंकार की वजह से पार्टी को नुकसान हुआ है।
फर्जी साइन केस से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब फर्जी हस्ताक्षर (Fake Signature Case) से जुड़े एक मामले में अभिषेक बनर्जी ने अपने वकील बदल दिए। पहले इस केस में कल्याण बनर्जी उनकी ओर से पैरवी कर रहे थे। आधी रात में वकील बदले जाने की जानकारी मिलने के बाद कल्याण ने इसे अपना अपमान बताया था।
अभिषेक ने भी नहीं दिया जवाब
कल्याण के बयान के बाद अभिषेक बनर्जी ने भी संयमित प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कल्याण उनसे उम्र और अनुभव में बड़े हैं, इसलिए उन्हें अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। अभिषेक ने कहा कि उन्होंने बचपन से उन्हें देखा है और वे उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे।
TMC में टूट पर क्या बोले कल्याण?
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में टीएमसी के भीतर जारी बगावत पर कल्याण बनर्जी ने कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, वे अंततः भाजपा (BJP) की शरण में जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और प्रशासन विपक्षी नेताओं को परेशान कर रहे हैं।
कल्याण ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और विपक्ष को अभूतपूर्व दबाव का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने TMC-Congress Merger की अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का कांग्रेस के साथ विलय का कोई इरादा नहीं है।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
कल्याण बनर्जी के बदले हुए तेवर यह संकेत देते हैं कि टीएमसी नेतृत्व फिलहाल आंतरिक विवाद को सार्वजनिक टकराव में बदलने से बचना चाहता है। ऐसे समय में जब पार्टी के कई सांसद और विधायक बगावत कर चुके हैं, शीर्ष नेतृत्व के करीबी नेताओं के बीच सुलह के संकेत ममता बनर्जी के लिए राहत की खबर माने जा सकते हैं।




