राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब राष्ट्रव्यापी राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा शुरू किया गया प्रदर्शन संसद मार्च के दौरान और अधिक हिंसक एवं तीव्र हो गया।
मंगलवार को विपक्षी नेताओं के सड़क पर उतरने और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पुलिस हिरासत के बाद यह मुद्दा सीधे केंद्र सरकार के द्वार पर पहुंच गया है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर शीर्ष नेतृत्व और सरकार के मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है, जिसमें संसद के भीतर और बाहर उपजे इस संकट से निपटने की रणनीति बनाई गई।
जंतर-मंतर से संसद तक: कैसे बढ़ा CJP का आंदोलन?
NEET 2026 की परीक्षा प्रक्रियाओं और परिणामों में धांधली के गंभीर आरोपों को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन ने तब जोर पकड़ा जब हजारों की संख्या में छात्र और CJP कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की है।
संसद मार्च और पुलिस के साथ झड़प
प्रदर्शनकारियों ने जब जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, तो पुलिस ने भारी सुरक्षा घेरा (Barricading) लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। स्थिति तब बेकाबू हो गई जब बैरिकेड्स तोड़ने के प्रयास में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया, जबकि पुलिस द्वारा कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
राहुल गांधी की हिरासत और राजनीतिक भूचाल
सोमवार और मंगलवार को हालात उस समय और अधिक संवेदनशील हो गए जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ विपक्षी नेता घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे और बाद में सड़क पर धरने पर बैठ गए। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राहुल गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस का आरोप: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “देश के युवाओं और छात्रों की आवाज उठाना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। सरकार पुलिस बल के दम पर छात्रों का भविष्य कुचलना चाहती है।”
शाह के घर आपात बैठक: सरकार की रणनीति और NDA का रुख
दिल्ली में बढ़ते तनाव और संसद में लगातार हो रहे हंगामे के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय गृह सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी व एनडीए के प्रमुख घटक दलों के नेता शामिल हुए।
क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर दबाव काम कर रहा है?
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह विपक्ष के राजनीतिक दबाव में आकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लेगी। सरकार का तर्क है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और दोषियों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
संसद में चर्चा बनाम सड़क पर संग्राम
गृह मंत्रालय और एनडीए नेतृत्व की बैठक में यह तय किया गया कि सरकार संसद के दोनों सदनों में NEET मुद्दे पर पूरी चर्चा कराने के लिए तैयार है। हालांकि, भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्ष इस मुद्दे पर समाधान ढूंढने के बजाय अराजकता और राजनीतिक सुर्खियां बटोरने का काम कर रहे हैं।
संसद में ‘ब्लैक प्रोटेस्ट’: विपक्ष का एकजुट प्रहार
बुधवार सुबह संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक) के सांसदों ने विरोध का अनूठा तरीका अपनाया।
- काले कपड़ों में पहुंचे सांसद: राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और दर्जनों सांसद काले कपड़े पहनकर संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एकत्र हुए।
- सरकार विरोधी नारेबाजी: सांसदों ने हाथ में “Save Education, Save NEET Students” की तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
- सदन की कार्यवाही बाधित: भारी हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
दिल्ली से पटना तक आंदोलन का दायरा: छात्र-युवा सड़क पर
यह आंदोलन अब केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रह गया है।
- बिहार (पटना): पटना के अशोक राजपथ और कोचिंग हब इलाके में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। पुलिस प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया है।
- उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल: लखनऊ, प्रयागराज और कोलकाता में भी विभिन्न छात्र संगठनों ने CJP के समर्थन में और NEET घोटाले के विरोध में मशाल जुलूस निकाले।
- अन्य राज्य: असम, केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी छात्र विरोध प्रदर्शनों की खबरें आ रही हैं।
क्या हैं CJP और छात्रों की मुख्य मांगें?
आंदोलनकारी छात्रों और CJP प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
| मांग | विवरण |
| NEET Re-exam / निष्पक्ष जांच | गड़बड़ी वाली परीक्षाओं की सर्वोच्च अदालत के रिटायर्ड जज की देखरेख में गहन जांच। |
| शिक्षा मंत्री का इस्तीफा | नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा। |
| मुआवजा | इस तनाव में जान गंवाने वाले या पीड़ित अभ्यर्थियों के परिवारों को वित्तीय सहायता। |
| CJP नेताओं की रिहाई | विरोध के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों और नेताओं पर से केस वापस लेना। |
यह भी पढ़ें: रैपर Santy Sharma को लगा तगड़ा झटका, CJP विवाद के बाद YouTube ने हमेशा के लिए डिलीट किया चैनल!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Jantar Mantar CJP Protest मुख्य रूप से किस मुद्दे को लेकर हो रहा है?
उत्तर: यह प्रदर्शन मुख्य रूप से NEET 2026 परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक के आरोपों और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किया जा रहा है।
Q2. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का इस आंदोलन में क्या योगदान है?
उत्तर: CJP इस छात्र आंदोलन की अगुवाई कर रही है। इसने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना और संसद मार्च का आह्वान किया, जिसे बाद में प्रमुख विपक्षी दलों का समर्थन मिला।
Q3. सरकार का NEET पेपर लीक विवाद पर क्या रुख है?
उत्तर: सरकार का कहना है कि उसने परीक्षा प्रणाली में पाई गई कमियों को ठीक कर लिया है, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (13+ गिरफ्तारियां) की गई है और वह संसद में इस पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।
Q4. संसद में विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर क्यों आए?
उत्तर: विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई, राहुल गांधी की हिरासत और NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए संसद में काले कपड़े पहने।
निष्कर्ष (Conclusion)
NEET परीक्षा धांधली को लेकर जंतर-मंतर से शुरू हुआ CJP का आंदोलन अब देश की राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक तरफ जहां लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, वहीं दूसरी तरफ यह मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का प्रमुख जरिया बन गया है।
गृह मंत्री अमित शाह के स्तर पर हुई बैठक और सरकार की संसद में चर्चा कराने की सहमति से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार इस गतिरोध को खत्म करना चाहती है। हालांकि, जब तक छात्रों की मुख्य मांगों और पारदर्शिता पर कोई ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक दिल्ली से लेकर पटना तक आंदोलन के शांत होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
अधिक जानकारी के लिए, आज ही Shabdsanchi के सोशल मीडिया पेजों को फ़ॉलो करें और अपडेटेड रहें।
- Facebook: shabdsanchi
- Instagram: shabdsanchiofficial
- YouTube: @shabd_sanchi
- Twitter: shabdsanchi




