रीवा: निकाय चुनाव से एक साल पहले राज्य सरकार का बड़ा दांव, रीवा नगर निगम में मनोनीत किए गए 8 नए पार्षद

8 new councilors nominated to the Rewa Municipal Corporation.

रीवा। मध्य प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए अब महज़ एक साल का समय शेष बचा है। चुनावी सरगर्मियों के बीच राज्य सरकार ने रीवा नगर निगम के लिए 8 नए पार्षदों के मनोनयन की घोषणा कर दी है। लंबे समय से एल्डरमैन बनने की राह देख रहे भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का इंतज़ार अब खत्म हो गया है। सरकार के इस फैसले से जहाँ पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह देखा जा रहा है, वहीं नगर निगम की भावी राजनीति में भी नए समीकरण बनते नज़र आ रहे हैं।

किसे मिली जिम्मेदारी?

राज्य शासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, भाजपा संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे नेताओं को तरजीह दी गई है। मनोनीत किए गए नए पार्षदों में सत्य प्रकाश सचदेवा, राजेंद्र शुक्ला, सरस्वती गुप्ता, मनोज पटेल, राजकुमार जायसवाल, प्रकाश सोनी, बुद्धसेन नापित और आनंद सिंह शामिल हैं। एल्डरमैन पद की दौड़ में कई दिग्गज नेता कतार में थे; इनमें से कुछ को मायूसी हाथ लगी, तो वहीं कई कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन में निष्ठापूर्वक कार्य करने का प्रतिफल मिला है।

रीवा नगर निगम में क्यों अहम है यह नियुक्ति?

वर्तमान में केंद्र और मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जबकि रीवा नगर निगम में महापौर की कुर्सी कांग्रेस पार्टी के पास है। ऐसे में मनोनीत किए गए ये आठों नए पार्षद नगर निगम परिषद में विपक्ष की भूमिका में नज़र आएंगे। महापौर कांग्रेस का होने के कारण रीवा की ‘शहर सरकार’ में इन नए एल्डरमैनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक मानी जा रही है।

क्या होंगे अधिकार और सीमाएं?

राज्य सरकार द्वारा नियुक्त इन पार्षदों को नगर निगम परिषद की बैठकों में भाग लेने और निगम की विभिन्न कार्यसमितियों में काम करने का पूरा अधिकार रहेगा। हालांकि, कुछ विशिष्ट परिस्थितियों—जैसे महापौर के चुनाव या अविश्वास प्रस्ताव के दौरानउन्हें मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

‘अब राजनीति छोड़ शहर के विकास पर ध्यान देंगे’

नियुक्ति के बाद मनोनीत जन प्रतिनिधियों ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी शुरू कर दी हैं। मनोनयन के बाद एक नव-नियुक्त महिला पार्षद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “अब राजनीति करने का समय समाप्त हो चुका है। हमारा मुख्य उद्देश्य और प्राथमिकता बिना किसी मतभेद के मिल-जुलकर रीवा शहर के चौमुखी विकास के लिए काम करना है।”

अब देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव से ठीक एक साल पहले सदन में प्रवेश कर रहे ये नए एल्डरमैन शहर के विकास और आगामी निकाय चुनावों में भाजपा को मजबूती देने में कितनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।

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