Social Media: आज के दौर में सोशल मीडिया सिर्फ इंटरटेनमेंट का माध्यम नहीं है। तनाव, अकेलापन या फिर उदासी महसूस होने पर बड़ी संख्या में लोग रील और शॉर्ट वीडियो देखने लगते हैं। डॉक्टर का मानना है कि यह आदत धीरे-धीरे इमोशनल तनाव से बचने का आसान तरीका बनती जाती है जिसका असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ताहै।

क्यों बढ़ रहा है आजकल रील्स देखने का ट्रेंड
मोबाइल और इंटरनेट की आसान पहुंच हो जाने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरीके से बदल चुकी है। अब खाली समय में ज्यादातर लोग इंस्टाग्राम फेसबुक या फिर यूट्यूब चलाना पसंद करते हैं। खासतौर पर छोटे वीडियो लोगों का ध्यान तेजी से अपनी और खींचते हैं लगातार बदलते कंटेंट दिमाग को कुछ समय के लिए वास्तविक परेशानियों से दूर कर देता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जब व्यक्ति तनाव या उदासी सा महसूस करता है तो उसका दिमाग ऐसी चीज खोजना जो उसको तुरंत राहत दे। रील और शॉर्ट वीडियो इसी जरूरत को पूरा करते हैं।
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Social Media और मानसिक स्वास्थ्य का रिलेशन
डॉक्टर बताते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किया गया है कि यूजर ज्यादा समय तक से जुड़ा रह सकता है। हर नया वीडियो या पोस्ट दिमाग में डोपामाइन रिलीज करता है जिससे थोड़ी देर के लिए ही हमें अच्छा महसूस होता है लेकिन यह राहत स्थाई नहीं होता है। धीरे-धीरे यह आदत वास्तविक समस्याओं को दूर ले जाने लगती है कई मामलों में लगातार स्क्रीन देखने से नींद की दिक्कतें मानसिक थकान और अकेलेपन की भावनाएं आने लगती है। खास तौर पर युवाओं में इसका असर देखने को मिलता है।
क्या हर बार सोशल मीडिया उपयोग गलत है?
सोशल मीडिया का उपयोग करना पूरी तरह से गलत नहीं होता है इसके जरिए लोग नहीं जानकारी थी हासिल करते हैं दोस्तों और परिवार से भी जुड़े रहते हैं। समस्या तब होती है जब व्यक्ति हर इमोशनल दिक्कतों से बचने के लिए मोबाइल का use करने लगे। अगर कोई व्यक्ति लगातार उदासी या चिंता महसूस कर रहा है तो उसे अपने करीबी लोगों से ही बात करनी चाहिए।
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संतुलन बनाना क्यों जरूरी होता है
डिजिटल दुनिया में मोबाइल का उपयोग आज लोगों की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया का उपयोग संतुलित तरीके से करना चाहिए, थोड़ी देर का
डिजिटल दुनिया आज लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल संतुलित तरीके से होना चाहिए। थोड़ी देर का मनोरंजन ठीक है, लेकिन वास्तविक भावनाओं को समझना और उनका सामना करना भी उतना ही जरूरी है।




